इस्कॉन क्या है? और इससे कैसे जुड़े | iskcon se kese jude

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इस्कॉन क्या है? और इससे कैसे जुड़े | iskcon se kese jude

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इस पोस्ट को पढ़ते समय इस बात का ध्यान रखे, मैंने कुल चार तरीके बताये है जिसके जरिये आप भारत के किसी भी इस्कॉन मंदिर से जुड़ सकते हैं। इस्कॉन वृंदावन मंदिर वृंदावन शहर का एक मुख्य पर्यटन स्थल हैं, इसे अंग्रेजों का मंदिर भी कहते हैं, जब मैं वृंदावन पहुँचते ही रिक्शा वाले को बोला इस्कॉन मंदिर ले चल तो उसने बोला क्या अंग्रेजों का मंदिर ? मैं समझ गया की ये इस्कॉन की ही बात कर रहा हैं, यहाँ पर 50 प्रतिशत से भी ज्यादा भक्त और सेवा देने वाले लोग विदेशी हैं, इसलिए हम भारतीयों को ये एक विदेशी लोगो का मंदिर लगता हैं। इस मंदिर का निर्माण इस्कॉन के संस्थापक भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी ने करवाया था। मेरा इस्कॉन टूर बहुत ही शानदार रहा। आपसे हाथ जोड़ कर निवेदन हैं, अगर आप इस्कॉन वृंदावन घूमना चाहते हैं, या किसी विशेष कारण से जा रहे हैं, तो इस पूरी पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े, आपके मन के सारे सवालों का जवाब इसमें हैं।

इस्कॉन मंदिर वृंदावन के बारे में 5 रौचक तथ्य

1. ये वृंदावन का सबसे प्राचीन वह लोकप्रिय मंदिर हैं। अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ ( इस्कॉन ) के फाउंडर आचार्य भक्तिवेदांत ने अपना लेखन समय वह अन्य गतिविधियों का ज्यादातर समय इसी मंदिर में गुजारा। इसके प्रमाण आप लाइव वहाँ पर जाकर देख सकते हो।

2. यहाँ पर हर दिन बीस से पचास हजार श्रद्धालुओं व स्थानीय गरीब लोगो को खिचड़ी (प्रसादम) खिलायी जाती है।

3. यहाँ पर मौजूद आचार्य भक्तिवेदांत के गुरुओं के म्यूजियम में लगी मानव-जीवन की चित्रावली हर श्रद्धालु को अंदर से हिला देती हैं, इसमें दिखाया गया हैं, की मनुष्य जीवन का असली उदेश्य क्या होना चाहिये।

4. कृष्णजन्माष्टमी के दिन मंदिर में पैर रखने की जगह नही मिलती हैं, इतनी भीड़ मौजूद रहती है।

5. इस्कॉन मंदिर वृंदावन की गोशाला बहुत ही अत्याधुनिक और प्राकृतिक हैं। यहाँ पर गोमाता की सही तरीके से देखभाल की जाती है।

इस्कॉन वृंदावन में क्या खास बात हैं ?

अगर आप एक पर्यटक हैं, तो लगभग दो से तीन घण्टे का समय आप इस मंदिर में व्यतीत करेंगे।

● यहाँ पर आप अमेरिका और अन्य विदेशी कृष्ण भक्त महिलाओं को हरे कृष्णा, हरे राम मंत्र जप करते देखेंगे और सुंदर मन को प्रसन्न करने वाला संगीत गाती देखोंगे। सच बात बोलू, तो यह दृश्य मन को बहुत सुकून देता हैं, की भारत में लोग राजनीति और गपशप के अलावा और कुछ नही करते, और ये विदेशी लोग हमारे हिन्दू धर्म को अपनाकर खुद को गौरवांवित महसूस करते हैं।

इस्कॉन मंदिर से 20 किलोमीटर दूर अंतरराष्ट्रीय भक्तिवेदांत गुरुकुल हमारे ऋषियों की हमें याद दिलाता हैं। यहाँ पर भी घूमने जरूर जाये। आप अपने बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान की शिक्षा देना चाहते हैं, और उन्हें पुरानी गुरुकुल शिक्षा पद्ति के अनुसार शिक्षा देना चाहते हैं, तो अपने बच्चों का एडमिशन जरूर करवाये। गुरुकुल बहुत बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ हैं और इस गुरुकुल में गोशाला भी हैं,

● आचार्य ए.सी. भक्तिवेदांत के जीवन संघर्ष की झलक आप इस इस्कॉन मंदिर में देखेंगे। वो क्या खाते थे, क्या चीजे प्रतिदिन उपयोग करते थे, उन सारी चीजो को आप उनके कमरे में लगी अलमारी में देख सकते हो।  इसके अलावा वो जिस स्थान पर जाकर बैठते थे, वहाँ पर भी आप जा सकते हो, वहाँ पर एक झूला लगा हुआ हैं।

● आचार्य भक्तिवेदांत जी का मंदिर भी बना हुआ हैं, जहाँ 24 घण्टे हरिकीर्तन चलता रहता हैं।

● आप आचार्य प्रभुपाद जी की जगह में जहाँ पर मंदिर के कृष्णभक्त और सन्यासी मंत्रजप करते हैं, कुछ समय के लिए आप भी वहाँ पर बैठकर दिव्य वातावरण का लाभ ले। आपका सारा तनाव खत्म हो जायेंगा। और यह अनुभव बहुत शांति देता है।

● यहाँ एक बड़ा हॉल भी बना हुआ हैं, जहाँ पर प्रतिदिन भगवदगीता का पाठ होता हैं।

कृष्ण बलराम मंदिर इस्कॉन वृंदावन में समयदान और जीवनदान कैसे करें

अगर आप किसी भी समस्या से परेशान हैं या आपको लगता हैं, की मैं जिस वातावरण में रह रहा हूँ, वो मेरे जीवन लक्ष्य के अनूकूल नही हैं। या फिर आप एक विधार्थी हैं, जो कुछ समय के लिए अपने घर से दूर रहकर मन को शान्त करना चाहते हैं,  तो  कृष्ण बलराम मंदिर इस्कॉन सबसे बढ़िया जगह हैं। क्यों वृंदावन ही? और भी तो बहुत सारे मंदिर हैं भारत में इस्कॉन के। तो सुनिये – आपको यहाँ पर हर दिन शुद्ध पंचगव्य खाने को मिलेंगा, एक दिव्य वातावरण मिलेंगा जिससे आप अपने मनुष्य जन्म को सफल बना सकते हो। इसके अलावा यहाँ पर हर दिन आपको विभिन्न अच्छी भक्तिमय गतिविधिया [spiritual activities]  करवाई जाती हैं, जिससे आप शाररिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य रह सको। अब अगर आपको इस मंदिर से जुड़ना हैं, तो सबसे पहले यहाँ के मंदिर के जो मैनेजर हैं, उनसे बात करनी होँगी, औऱ सारी बाते सच-सच बतानी होंगी।

दूसरा तरीका- अगर आपके पास कोई विशेष डिग्री या कौशल (skill) हैं, तो आपको आसानी से मंदिर में रहने का मौका मिल जायेंगा।

तीसरा  तरीका– आप इस्कॉन गोशाल में फ्री में सेवा करके भी इस्कॉन से जुड़ सकते हो। गौमाता की सेवा भी हो जायेंगी और सप्ताह में एकबार वृंदावन जाने का मौका भी मिल जायेंगा, यह सारे काम मैने किये हैं, इसलिए आपको अनुभव के आधार पर बता पा रहा हूँ।

चौथा तरीका-  भारत के किसी भी इस्कॉन मंदिर से जुड़ने के लिए आप आजीवन सन्यासी बनकर जुड़ सकते हैं मतलब आपको घर/परिवार सबकुछ छोड़ना पड़ेंगा और सिर्फ भगवान कृष्ण की भक्ति में अपने जीवन को लगाना होंगा।

फ्री में पूरे दिन वृंदावन कैसे रहे और इस्कॉन की सेवाओ का लाभ उठाएं

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अगर आप घर से भाग के निकले हैं, किसी भी पारिवारिक या सामाजिक समस्या के कारण या कुछ दिन वृंदावन में रहना चाहते हैं- मानसिक सुख के लिए और आपके पास पैसे नही हैं, रात को होटल में रूकने के लिए, सुबह और शाम का भोजन करने के लिए, तो मै आपको यहाँ पर अपना व्यक्तिगत अनुभव आपके साथ साझा करूँगा। आप शाम को तो किसी भी जगह इस्कॉन मन्दिर के आसपास बैठने का शेल्टर लगे हुये होते हैं, वहाँ पर सो जाओ, और सुबह फ्रेश होने के लिए मतलब नहाना और शौच आदि के लिए सुबह 3:30 बजे इस्कॉन मंदिर खुल जाता हैं। मंदिर के अंदर आप जैसे ही घूसोंगे सबसे लास्ट में शानदार साफ  बाथरूम बने हुये हैं, वहाँ पर फ्रेश हो जाओ। फिर 8 बजे तक इस्कॉन की आरती व सभी गतिविधियों में भाग लो और 9 बजे पेट भरकर प्रसाद खिचड़ी खा लो। कोई मना नही करेंगा। उसके बाद आप इसी मंदिर के रोड पर दाए तरफ कृपालु महाराज का भव्य प्रेम मंदिर हैं, अभी तीन पांच घण्टे आप यहाँ पर बिताये। और शाम को 5 बजे फिर से इस्कॉन मंदिर आ जाओ भरपेट प्रसाद खा लो और 8 बजे तक इस्कॉन के भक्तिमय, दिव्य और सुरक्षित वातावरण में रहो। वैसे मेरा अनुभव हैं, भगवान कृष्ण की नगरी में कोई भूखा नही रहता हैं, यहाँ पर आपको बहुत सारे संगठन और लोकल लोग सुबह नास्ता और भोजन की व्यवस्था करते हैं। बस आप पैदल सुबह-सुबह घूमते रहो, आपको प्रसाद भोजन वितरण करने वाले कृष्ण भक्त  दिख जायेंगे।

इस्कॉन गौशाला वृन्दावन

मैं इस गोशाला में 5 दिन ठहरा और फिर गोसेवा के लिए भक्तिवेदांत फार्म हाउस चला गया। अगर आप वृंदावन में कुछ दिन घूमना चाहते हो और सस्ती परन्तु एक शान्त बढ़िया वातावरण की तलाश कर रहे हो तो यहाँ पर मात्रा दो हजार रूपये देकर एक महीने आप रूक सकते हो। और यही पर आप 50 रूपये देकर भरपेट गोबर खाद का ऑर्गेनिक फ़ूड खा सकते हो।  इसके अलावा इस गोशाला में सारी नई सुविधा हैं। लगभग 100 से 500 गाय यहाँ पर हैं। इस्कॉन में मिलने वाले ज्यादातर गौउत्पाद यही पर बनते हैं।

भारत के इस्कॉन गुरुकुल और स्कूल के बारे में। [ iskcon school & Gurukul ]

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Image Credit –  www.bgis.org

Address ;-
Bhaktivedanta Swami Marg, Raman Reti, Vrindavan, Uttar Pradesh 281121.

सबसे पहले मैं इस्कॉन गुरुकुल वृंदावन ( Bgis ) की बात करता हूँ क्योकी यहाँ पर मैंने एक महीने से अधिक समय बिताया। विद्यालय परिसर का वातावरण बहुत ही सुदूर इलाके और एकदम शांत जगह पर है, जहाँ पर कोई डिस्ट्रैक्शन नही हो सकता। गुरुकुल से पांच किलोमीटर दूर ajhai जैसे छोटे चार-पांच गांव है। अब बात करते है विद्यालय परिसर की सुख-सुविधाओं की;-

●  यदि आप अपने बच्चों को संस्कारवान, मेधावी और एक अच्छा इंसान बनाना चाहते हैं, तो वृंदावन या भारत के किसी भी iskon school/ Gurukula में एडमिशन जरूर करवाये।

● इस्कॉन विद्यालय में एक कक्षा हर रोज भगवदगीता की लगती हैं। जिसमें  सन्यासी शिक्षक उन्हें श्लोक वह उसका हिंदी भावार्थ समझाते हैं साथ ही उस श्लोक का हमारे जीवन से क्या नाता है उस जीवन ज्ञान को भी सिखाते हैं।

● यहाँ पर पढ़ने वाले बच्चों को कृष्ण जन्माष्टमी और अन्य उत्सवों को विद्यालय में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, बहुत सारी बौद्विक, सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इन कार्यक्रमों में उपदेश देने के लिए बड़े-बड़े आध्यात्मिक संत आते हैं।

● विद्यालय परिसर बहुत खूबसूरत, लंबा-चोड़ा, सुरक्षित और सुव्यवस्थित है। यहाँ पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किसी प्रकार की कमी नही होती हैं। हर चीज की व्यवस्था वह उसके लिए एक अलग टीचर रखा गया है।

● विद्यार्थियों को सुबह पोष्टिक नास्ता और दो समय का सात्विक भोजन मिलता हैं।

● गुरुकुल में विद्या ग्रहण करने वाले बच्चों को महीने में एक – दो बार ‘वृंदावन इस्कॉन मंदिर’ जाने का अवसर मिलता है, इस समय सारे बच्चे बहुत प्रफुल्लित और प्रसन्न रहते हैं क्योकी यह खुशी मैंने खुद ने अपनी आंखों से देखी है जब मैं भी उनकी स्कूल बस में बैठकर उनके साथ गोलोक (Vrindavan) जा रहा था।

 श्री भक्तिवेदांत प्रभुपाद फार्म हाउस  [Bhaktivedanta Farm]

भक्तिवेदंता फार्म हाउस वृंदावन  ‘iskcon farm communities’ का हिस्सा है। इस्कॉन संगठन का निर्माण करने वाले प्रभुपाद जी का यह विजन था, की हर जगह  ‘eco Farm hous ‘ का निर्माण हो ताकी सभी लोग जैविक खाद से बना भोजन कर सके। अभी मैं आपको भक्तिवेदंता फार्म  वृंदावन के बारे में जानकारी दूंगा क्योकी मैंने वहाँ पर एक महीने ‘समयदान’  [Time Donation] दिया था। मेरा यहाँ पर रहने का एकमात्र यही उद्देश्य था की मैं कुछ समय यहाँ पर शांति से रहूँ और शुद्ध भोजन व प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहकर अपने स्वास्थ्य लक्ष्य  [Health Goal] को प्राप्त कर सकू। यहाँ की कुछ विशेषता और जरूरी बातें;-

● अगर आप भी कृष्ण भक्त हैं या फिर इस्कॉन से किसी न किसी माध्यम से जुड़े हुए हैं तो आप कुछ समय मुफ्त में यहाँ पर सेवा कार्य करके गुजार सकते हैं और सभी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।

● ये सेवा कार्य आप फार्म में कर सकते हैं;-
रसोइये का (दो समय खाना बनाना),  खेतीबाड़ी का, गौसेवा का और फार्म हाउस देखरेख का।

● यहाँ पर शुद्ध जल, शुद्ध भोजन (Organic Food), वह प्रदूषण रहित वातावरण आपको मिलेंगा। साथ ही आपको विभिन्न प्रकार  के प्रजातियो के पशु-पक्षीयो को देखने का मौका मिलेगा। जिसमें नीलगाय मुख्य है।

● हर दिन आपको ‘पंचगव्य’ खाने को मिलेंगा। अगर आप तनाव, स्ट्रेस, टेंशन में है तो यहाँ पर कुछ दिन जरूर गुजारे।

 अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ [इस्कॉन] से जुड़ने के नियम व शर्ते

● आप किसी भी प्रकार के मांसाहार का सेवन नही कर सकते।

● आपको 16 माला  ‘हरे कृष्णा’ महामंत्र जप प्रतिदिन करना आवश्यक हैं।

● आप गर्लफ्रेंड व बॉयफ्रेंड नही बना सकते। आपको काम-वासना को भूलना पड़ेंगा।

● आप प्याज, लहसून जैसे सभी तामसिक श्रेणी के भोजन नही खा सकते।

● आपको भारतीय वेशभूषा धोती-कुर्ता पहनना आवश्यक हैं।

● आपको हमेशा सात्त्विक भोजन ही करना हैं, मतलब ज्यादा तला-भूना आप नही खा सकते।

● आपको किसी भी व्यक्ति के नाम के पीछे ‘प्रभुजी’ लगाना आवश्यक हैं। उदाहरण;- आपका नाम गोपाल है, तो अगर आप इस्कॉन से जुड़ते हैं, तो इस्कॉन के सभी भक्त आपको गोपाल प्रभुजी बोलकर संबोधित करेंगे।

● एक और काम की बात, आप किसी को तू-ता नही कर सकते इसके अलावा आपको किसी व्यक्ति को आवाज देनी हैं, तो आपको हरे कृष्णा बोलना हैं। कोई भी खुशी की बात है, या आपको अपनी ख़ुशी को सबके सामने प्रकट करना हो, तो आपको ‘हरि-बोल’  बोलना पड़ेंगा। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।

● हर एकादशी को 2 बजे तक आपको उपवास रखना पड़ता है।

 इस्कॉन में शामिल होने के लाभ

1. यह भारत और दुनिया का कृष्ण भक्ति में सबसे बड़ा संगठन हैं। तो इससे जुड़ने के बाद आपकी अलग पहचान बनती हैं।

2. आप इस्कॉन से जुड़ने के बाद अपने-आप  अंग्रेजी सीख जाते हो। क्योंकि यह एक इंटरनेशनल  संस्था हैं, इसलिए विदेशी लोग यहाँ पर ज्यादा आते हैं। आप माहौल से ही अंग्रेजी बोलना सीख जाओगे।

3. जैसे-जैसे आपका ज्ञान बढ़ता हैं, अगर आप भगवद्गीता के ज्ञान को आत्मसार कर लेते हो, तो
आपको भारत के अलग- अलग राज्यो के शहरों में  घूमने का मौका मिलता है। और कभी-कभी विदेश में भी।

4. शुद्ध पंचगव्य खाने को मिलता हैं। अगर आप स्वास्थ्य को लेकर टेंशन में हैं? तो बिना देरी किये जुड़ जाओ। पूरे शरीर का कायाकल्प होंगा।

5. आपको दिव्य वातावरण मिलता हैं। हर समय पॉजिटिव माहौल रहता हैं। कोई लड़ाई -झगड़ा नही होता हैं।

इस्कॉन मंदिर की दिनचर्या

●  सुबह आपको 3 बजे उठकर नहा -धोकर मंदिर की मंगल आरती में हिस्सा लेना हैं।

● फिर 8 बजे प्रभुपाद जी की आरती होती है।

● सुबह – सुबह तुलसी माता (तुलसी के पौधे) की भी सुंदर गीत के साथ परिक्रमा के साथ पूजा की जाती है।

●फिर 2 बजे प्रसाद शुरू होता हैं, बड़े मंदिरों में जहाँ आप 100 रुपये देकर अच्छा पोष्टिक भोजन कर सकते हो।

●संध्याकाल  5 बजे और रात्रि 8 बजे भव्य आरती होती हैं

● बहुत सारे इस्कॉन मंदिर में 24 घण्टे प्रसादम चलता रहता हैं। उदाहरण – नामपल्ली, हैदराबाद।
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इस्कॉन का मतलब क्या है?

इस्कॉन का अर्थ –  मन की शांति, प्रसन्नता और सुख प्राप्ति करने की जगह। पूरी दुनिया के विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों में इस्कॉन सबसे अलग हैं। इस संगठन से जुड़ने वाला हर एक व्यक्ति जीवनभर खुश रहता हैं। वो यहाँ से सीखता हैं, मनुष्य जन्म का मतलब कर्म और कृष्ण भक्ति ही हैं।  मैंने सबसे पहले इस्कॉन के बारे में इंटरनेट पर सुना था और दूसरी बार मैं, एक मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिन्द्रा जी  के सेमिनार में दिल्ली शहर गया था, और यह सेमिनार इस्कॉन संस्था की तरफ से ही था। इस सेमिनार में दिल्ली इस्कॉन मंदिर के प्रभु जी और इस्कॉन के ही बड़े आध्यात्मिक गुरु आये हुये थे। यहाँ से मेरा भी विचार परिवर्तन हुआ और फिर मेरा रुझाव इस्कॉन की तरफ बढ़ता चला गया।

 लोग इस्कॉन मंदिर को अंग्रेजों का मंदिर क्यों कहते हैं?

सबसे पहले एक बात में साफ-साफ बोलना चाहता हूँ, की यह किसी विदेशी आदमी या यूरोपीय देशों का संगठन नही है। इस संगठन की नींव भारत के भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी ने रखी थी। और आज उनके देश-विदेश के सैकड़ो अनुयायी उनके इस कृष्ण ज्ञान को पूरी दुनिया में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। भारत के सभी इस्कॉन मंदिर में आपको विदेशी लोग दिखेंगे,  आपको बता दू, ये सारे वे लोग हैं, जिन्होंने हमारे सत्य सनातन हिन्दू धर्म को अपनाया हैं। वह एक साधू की तरह अपना पूरा जीवन बिताते हैं। तो आप इन्हें अंग्रेज कैसे बोल सकते हैं? जब आप इन लोगो के मुँह से हरे राम, हरे कृष्ण का मंत्र सुनोगे तो आपको खुद को शर्मिंदगी महसूस होंगी, कि यार हम अपने धर्म के संस्कार, रीति-रिवाज भूल गये और इन अंग्रेजों को देखो कितने खुश हैं- हिन्दू संस्कृति को अपनाकर।

इस्कॉन मंदिर की सच्चाई, क्या भारत से पैसे विदेश भेजे जाते हैं ?

आप हरे कृष्णा टीवी यूट्यूब चैनल पर एक बार अमोघ लीला प्रभु जी का वीडियो जरूर देखें। आपके सारे सवालों के जवाब मिल जायेंगे। आप पहले खुद एकबार रिसर्च कीजिये की ये अमेरिकन संस्था नही हैं, यह एक इंटरनेशनल संगठन हैं। इसके अलावा अगर इस संस्था का उद्देश्य भारत से पैसे लेकर अमेरिका भेजना होता ! तो सबसे पहले मंदिर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य यूरोप के देशों में क्यों बनाये ? फिर तो भारत में मंदिर ज्यादा और पहले बनने चाहिये ना?  इसके अलावा इस्कॉन के अंदर जो दान – चढ़ावा आता हैं, उसका सारा पैसा भूखे लोगो का पेट भरने के लिए लगाया जाता हैं। भारत में इस्कॉन हर दिन 50 लाख लोगो को प्रसादम के रूप में, फ़ूड फ़ॉर लाइफ या मिड-डे-मिल के रूप में भोजन खिलाता हैं। क्योंकि भक्तिवेदांत प्रभुपाद जी का सपना था, कोई भी व्यक्ति दुनिया में भूख से ना मरे। इसके अलावा इस्कॉन जिसने बनाया वो एक भारतीय व्यक्ति हैं, और अगर कोई विदेशी होता तो आप बोल सकते हो की भारत का पैसा विदेश जाता हैं।

भारत के सबसे बड़े व प्रसिद्ध  इस्कॉन टेम्पल के नाम 
1. इस्कॉन चंद्रोदय मंदिर,मायापुर शहर,  पश्चिम बंगाल में।
2.  श्री राधा कृष्णा - चंद्रा मंदिर, बैंगलोर, कर्नाटक।
3. राधा राधिकारमण -, कृष्ण बलराम, दिल्ली शहर।
4.  श्री श्री राधा रास बिहारी जी मंदिर, जूहू, मुंबई।
5. पुणे, अहमदाबाद, वृंदावन इस्कॉन टेम्पल।

Isckon FAQ

इस्कॉन की स्थापना कब हुई?

13 जुलाई 1966, न्यूयॉर्क शहर, संयुक्त राज्य अमेरिका।

इस्कॉन कितने देशों में है?

लगभग 175 देशों में ‘हरे कृष्णा आंदोलन’ फैला हुआ है और पूरे विश्व में 850 शाखाएं है।

इस्कॉन का संस्थापक कौन है?

श्री भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी।

इस्कॉन सदस्यता शुल्क कितनी है?

इस्कॉन से जुड़ने की फीस एकदम निशुल्क है। अगर आप हर साल दान देना चाहते हैं तो मंदिर में जाकर अपनी मेम्बरशिप रसीद बनवा सकते हैं और अपना नाम लिखवा सकते हैं।

Iskcon ka full form abbreviation

अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ. international society for krishna consciousness

भारत में इस्कॉन मुख्यालय कहां पर स्थित है?

मायापुर, पश्चिम बंगाल।

हरे कृष्णा भक्त और विदेशी मांसाहार का सेवन करते हैं?

बिल्कुल नही। मांस, मछली, मीट, अंडा, वह समस्त नशीले पदार्थ वर्जित हैं। आपको शुद्ध शाकाहारी भोजन करना पड़ेंगा।

कृष्ण भक्त वह आध्यात्मिक संगठन के लोग लहसून और प्याज क्यों नही खाते?

क्योकी यह तामसिक भोजन की श्रेणी में आता है, जिससे काम-वासना की तरफ मन उतेजित होता है।

इस्कॉन मंदिर का पैसा कहा जाता है?

पैसा कही पर भी जाये उससे कोई फर्क नही पड़ता जो पैसा आता है उसका शत प्रतिशत मानवता के कल्याण के लिए और भुखमरी की समस्या को खत्म करने के कार्यो में लगाया जाता हैं। वैदिक संस्कृति को आगे बढ़ाना, गरीब बच्चों को पोष्टिक भोजन खिलाना, तनाव अवसाद में डूबे करोड़ो लोगो को संकीर्तन आन्दोलन के जरिये बाहर निकालना इन सब कार्यो में इस्कॉन का पैसा लगता हैं। मैं खुद 3 महीने पूरा माहौल देखकर आया हूँ।

Official Website Name & Contact Number

https://www.iskcon.org

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5 thoughts on “इस्कॉन क्या है? और इससे कैसे जुड़े | iskcon se kese jude”

    • Hello shailly,
      Full article read kare. Aapke sabhi sawalo ke jawab essi article me diye huye hain. Agar Start se end tak Article padhne ke baad bhi kuch samajh me naa aaye tou uske baad Mujhse Mere site ke Contact us ya about us me jaakar mujhe email kare. Vha par aap mujhe call karke baat kar sakte hain. Me aapko kuch personal tips bata saktaa hoon.

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    • Jee Bilkul, iskcon se female mahilayen bhi jud saktee hsin! but aap temple me nahi ruk saktee. aap ghar par rahkar hee saare iskon ke niyam ka paalan kar saktee hain. halaanki bahut saari videshi ladkiya (mataji) iskon mandir me full time kaam kartee hain. usske liye aappko isckon temple me jaakar hee contact karnaa hongaa. eske alava aap kisi prabhuji jou kee famous isckon guru hain unse Diksha lekar bhi krishna ko apna jeevan samarpit kar saktee hou.

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