भारत का सबसे बड़ा आश्रम शांतिकुंज हरिद्वार | shantikunj ashram haridwar

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भारत का सबसे बड़ा आश्रम शांतिकुंज हरिद्वार | shantikunj ashram haridwar

लगभग तीन किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला शांतिकुंज आश्रम भारत का सबसे बड़ा और अद्भुत आश्रम हैं। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य इस आश्रम के संस्थापक हैं। 30 करोड़ लोगो का परिवार अखिल विश्व गायत्री परिवार और गुरुजी के ” युग परिवर्तन” मिशन का काम सब यही होता हैं। यहाँ पर भारत देश के सभी राज्यो के लोग समयदानी और जीवनदानी के रूप में श्रीराम शर्मा जी के अधूरे सपनो को पूरा करने में लगे हैं। यह सब लोग बहुत ही अच्छे हैं। यह मात्र आश्रम ही नही, एक अभियान भी हैं। लक्ष्य है- समाज में फैली गलत विचारधारा और अधर्म को मिटाकर मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण। सतयुगी समाज की एक फिर से स्थापना और युग परिवर्तन।  यहाँ पर युगऋषि श्रीराम शर्मा और उनकी धर्मपत्नी माता भगवती देवी का प्रचण्ड तप, यहाँ निरंतर हो रहे करोड़ो गायत्री महामंत्र जप एंव हजारो श्रद्धालु द्वारा किये जाने वाले गायत्री यज्ञ की ऊर्जा से यह एक अत्यंत प्रभावशाली सिद्धभूमि बन गयी है। यहाँ आकर लोग अपने जीवन में सुनिश्चित परिवर्तन अनुभव करते हैं। जप-तप की यह ऊर्जा साधना में आ रहे अवरोधों को दूर कर उसे गति प्रदान करती हैं, गहरी ध्यानावस्था में ले जाती हैं।  शांन्तिकुन्ज आश्रम में कुल 5 गेट हैं। आपको आश्रम में प्रवेश गेट नम्बर 1 से मिलेंगा। अगर आप शांतिकुंज के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं और मेरे दो महीने के अनुभव से कुछ जीवन उपयोगी बाते सीखना चाहते हैं? तो ये पूरी पोस्ट अंत तक पढे बहुत सारी ऐसी बातें इस पोस्ट के अंदर आप जानेंगे जिससे आपके जीवन में जबरदस्त बदलाव आ सकता है, आपको नया जीवन जीने की सही दिशा मिल सकती है।

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शांतिकुंज हरिद्वार में ठहरने की निःशुल्क व्यवस्था

सबसे पहले बात करते हैं  Free Hotel in Haridwar City के बारे में!

 

[अ.] फ्री होटल – वैसे तो हरिद्वार शहर में सेंकडो आश्रम है जहाँ पर रहने की मुफ्त में व्यवस्था है, पर मुझे हरिद्वार में ‘हर की पौड़ी’ तीन से ज्यादा गंगा घाट और बहुत से एरिया में, घूमा परन्तु मुझे एक भी आश्रम या स्थान ऐसा नही मिला जो मुफ्त हो और अच्छा हो। अब बात करते हैं शान्तिकुन्ज की तो यह पूरे हरिद्वार शहर में एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ पर आप निशुल्क जितने दिन चाहे रह सकते हैं और सारी VIP (उच्चस्तरीय ) सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। शुद्ध हवा, शुद्ध भोजन, शुद्ध बुद्वि के लोगो के साथ रहने का आनंद ले सकते हैं। पर अब बात आती हैं आप किस तरह या कैसे शान्तिकुन्ज में कुछ दिन रूक सकते है?

 

  तरीका नम्बर -१
अगर आप किसी परेशानी का सामना कर रहे हो वो समस्या (पारिवारिक, समाजिक, स्वास्थ्य की ) कोई भी हो सकती है। तो आप जैसे ही शान्तिकुन्ज में प्रवेश करोंगे तो ‘ स्वागत कक्ष’ (Reception Room ) के ठीक दो कदम आगे एक मार्गदर्शन रूम आयेगा वहाँ पर सफेद कुर्ता और धोती पहने बाउजी बैठे होंगे उनसे बात करे सारी बाते उन्हें बता दे, वो आपको अपनी तरफ से कुछ न कुछ जुगाड़ करके आपको कुछ दिन ठहरा देंगे। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। ये बाउजी बहुत ही व्यवहारिक है अन्य शोषित लोगो का दुख और भावना को समझते हैं। मेरे सर्वे के अनुसार शांतिकुंज में आने वाले 20 से 30 प्रतिशत वो लोग होते हैं जो किसी न किसी बड़ी समस्या में फंसे हुए हैं और कुछ समय के लिए शांत वातावरण की तलाश कर रहे होते हैं ऐसे में उनको शान्तिकुन्ज एक ‘स्वर्ग’ की तरह लगता हैं।

 

  तरीका नम्बर -२
शान्तिकुन्ज में कुल भारतीय सोलह संस्कार हमारे प्राचीन रीति-रिवाजों द्वारा करवाया जाता हैं जिसके बारे में विस्तृत जानकारी आप इसी पोस्ट में पढ़ेंगे तो आप उनमें से जो आप कर सकते हो या जिसमे आप कर सकते हो उसका स्वागत कक्ष में फॉर्म भरकर रजिस्ट्रेशन करवा दे तो आपको वो रिसेप्शन वाले पेपर पर कमरा नम्बर लिखकर दे देंगे जिसमें आपको रहना है।

 

   तरीका नम्बर -३
शान्तिकुञ्ज में हर महीने – हर साल बहुत सारे शिविर चलते रहते है, तो आप शिविर में हिस्सा लेकर मुफ्त में 9 दिन से 40 दिन तक ठहर सकते हैं। शिविर की सारी जानकारी आप ऑफिसियल वेबसाइट से ले सकते हैं और शांतिकुज स्टाफ से बात करके भी जा सकते हैं। पोस्ट के अंत में शिविर की जानकारी, वेबसाइट व सोशल मीडिया लिंक्स आपको मिलेंगे इसलिए पूरी पोस्ट पढे।

 

   तरीका नम्बर – ४
समयदान और जीवनदान देकर भी आप शान्तिकुन्ज में पूरी जिंदगी, कुछ महीने या कुछ साल आप रूक सकते हैं। ये सबसे बढ़िया तरीका है किसी भी आश्रम में आजीवन/अल्पकालिक समय तक रहने का।

 

[ब.] आवासीय सुविधा –  इसका मतलब है की अगर आपके पास ज्यादा पैसा है, तो शान्तिकुन्ज के अंदर ही कुछ वीआईपी रूम बने हुए हैं तो आप परिवार के साथ रह सकते हैं। साथ ही आश्रम के अंदर ही सारी खाने-पीने की चीज उपलब्ध हैं तो आप खरीद सकते हैं या आप मुफ्त का भोजन नही करना चाहते तो उसके लिए एक अलग होटल की व्यवस्था भी है जिसमे आप 30 से 50 रुपये देकर अलग आपके पसंद का भोजन कर सकते हैं। लेकिन आप एक गरीब या मध्यम वर्गीय परिवार से हो तो मैं आपको सलाह दूंगा, की आप फ्री के रूम में ही रहे क्योकी इसमें भी आपको एकदम साफ- सुथरी और अच्छी सुविधा के साथ बेड, नहाने के लिए बाथरूम, वह शुद्ध जल मिलेगा। आपको यह बात जानकार हैरानी होंगी की शान्तिकुन्ज के पास ही गंगा घाट है और उसी घाट से शांतिकुज में पानी आता है, नल कनेक्शन लिया हुआ है इसका मतलब यह है, की आप चौबीस घण्टे शुद्ध ऑक्सीजन देने वाला पानी आपको प्राप्त होंगा क्योंकी एक रिसर्च में यह बात पता चली है की- गंगाजल में सबसे अधिक प्राणऊर्जा होती हैं। मैं, ये पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ की यहाँ पर पानी की कमी बिल्कुल नही है आप जितना मर्जी उतना नहाने, धोने व खाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हो।

 

 

[स.] आध्यात्मिक ज्ञान – को अंग्रेजी में ‘Spiritual Knowledge’ ( स्प्रिचुअल नॉलेज ) बोलते हैं। गायत्री तीर्थ शान्तिकुन्ज में आप आध्यात्मिकता की असली परिभाषा को समझेंगे। जिसमें मंत्रजप, साधना, उपासना, ब्रह्चर्य, वैदिक दिनचर्या इत्यादि के बारे में सिर्फ ज्ञान नही बाटेंगे बल्की आपको इम्पलीमेंटेशन (implement) भी करवायेंगे और आपका पूरा आध्यात्मिक विकास करेंगे।

 

 

{A.} मंत्रजप – प्रतिदिन आपको दो माला गायत्री मंत्र जप करवाया जायेगा। और अगर आप कोई शिविरार्थि हो तो आपको प्रतिदिन 3 से 24 माला भी करनी पड़ सकती है। डरे ना यही इस आश्रम की ताकत है और यही चीज आपके मन के डर, दुख और निराशा को दूर करेंगी जिसका नाम है- गायत्री मंत्र जप!

 

{B.} साधना – का मतलब एक समय उपवास, सात्विक भोजन करना, अस्वाद भोजन, न्यूनतम दो घंटे मौन हर रोज रखने का अभ्यास करना।

 

{C.} उपासना – का मतलब प्रतिदिन गुरुदेव या उगते हुए सूर्य भगवान का ध्यान करते हुए ३ माला
गायत्री मंत्र जप करना। पैसों का संयम, विचार संयम के साथ समय संयम का पालन करना।

 

{D.} स्वाध्याय – पूज्य गुरुदेव द्वारा लिखित पुस्तको का हर दिन अध्ययन करना और अपने जीवन की कामयाबी के लिए हर दिन चिंतन करना।

 

देवात्मा हिमालय मेडिटेशन के लिए

शांतिकुंज आश्रम में देवात्मा हिमालय भवन गेट नम्बर 4 पर भोजनालय के सामने बना हुआ हैं। यहाँ पर साधक और सभी श्रद्धालु सुबह 4 बजे मेडिटेशन करते हैं। वैसे किसी भी समय आप अंदर जाकर दिव्य हिमालय जैसे वातावरण का आनंद यहाँ पर ले सकते हैं। गुरुजी ने यह भवन उन लोगो के लिए बनाया जो हिमालय पर जाकर साधना नही कर सकते हैं। मेरा अनुभव यह हैं की सुबह 4 से 5 बजे तक का माहौल सही होता हैं क्योकी इस समय दो – तीन लोग ही अंदर आते हैं। देवात्मा हिमालय एक meditation Hall का नाम है, जिसमें शांतिकुंज के लोग और बाहर से दर्शन करने आने वाले साधको और पर्यटकों के लिए सुबह 3 बजे से शाम 9 बजे तक खुला रहता है। सब्बे अच्छी बात इस मेडिटेशन केंद्र में हूबहू हिमालय स्थापित किया गया है यह हिमालय किसी विशेष धातु या पर्दाथ से बना है। इसको देखते ही हमें ऐसा लगता है की हम वास्तव में हिमालय के ऊपर या अंदर ही बैठे हैं। यहाँ पर अगर आप 10 मिनट भी आँख बंद कर बैठते हैं एकदम शांत चित्त होकर तो आपको दिव्य आनंद मिल सकता हैं। जब मैं युगशिल्पी शिविर कर रहा था तब प्रतिदिन सुबह ४ बजे और शाम को ३ बजे ध्यान करने चला जाता था। कभी – कभार तो 3-4 बार चला जाता था। यह देवात्मा हिमालय वाटिका- वृक्ष के पास में दूसरा रास्ता भोजनालय के मुख्य प्रवेश द्वार बाए तरफ (लेफ्ट साइड) में आया हुआ है। और अंदर जाते समय फोन एकदम साइलेंट कर दे या स्विच ऑफ कर दे ताकी अंदर अन्य ध्यान करने वाले लोग डिस्टर्ब ना हो।

 

 शान्तिकुंज जाने का सबसे अच्छा समय कौनसा है?

अगर आप आश्रम का पूरा भरपूर आनंद लेना चाहते हैं तो कुछ त्यौहार शान्तिकुन्ज में मनाये जाते हैं जिसमें हिस्सा लेकर आप पूरे दिन अपने परिवार के साथ Quality Time बिता सकते हो।

(१). गायत्री जयंती – गायत्री जयंती महोत्सव में शामिल होने के लिए आपको दस दिन पहले ही ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण / रजिस्ट्रेशन करवाना होंगा क्योंकी अगर आप उसी दिन बिना योजना बनाकर आयेंगे तो आश्रम में पैर रखने की भी जगह नही बचेंगी। बहुत भारी संख्या में पूरे देश के अलग-अलग राज्यो से लाखों लोग इस गायत्री जयंती उत्सव में शामिल होने के लिए आते हैं। सुबह से लेकर शाम तक विभिन्न प्रकार की गतिविधियां चलती रहती हैं। सुबह हरिद्वार शहर में ढोल-नगाड़ों और बैंड- बाजा के साथ जूलूस निकाला जाता है। जिसमें सकारात्मक सद्विचारों के साथ साधक व आश्रमवासी नारे लगाते हैं। मुझे ढोल  बजाने का मौका मिला, इसके लिए मैं संगीत विभाग के सभी लोगो का धन्यवाद करना चाहता हूँ

 

(२). वसंत पंचमी – का त्योहार भी बड़ी- धूमधाम के साथ मनाया जाता हैं। सुबह आश्रम में जो हर रोज खाना बनता है उससे हटकर पांच पकवान और मिष्ठान बनाये जाते हैं। दीदी और भैया (अभी आश्रम के संचालक) द्वारा भाषण होता है जिसमें
वसंत पंचमी का महत्व बताया जाता हैं। जिसमें हरिद्वार शहर की सभी विद्यालयो के बच्चें हिस्सा लेते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।

 

(३.) गुरु पूर्णिमा –  यह शन्तिकुज आश्रम में मनाया जाने वाला सबसे बडा कार्यक्रम है। क्योंकी इसी दिन शांतिकुज आश्रम और युग निर्माण की नींव रखने वाले युगपुरुष गुरुदेव पंडित श्री राम शर्मा आचार्य का जन्म हुआ था। इसी खुशी के उपलक्ष्य में गुरुदेव के सारे भक्त अपने काम-धंधे सभी काम छोड़कर पूरे परिवार समेत सान्तिकुज दर्शन करने आ जाते हैं। सम्पन्न परिवार के लोग तो गुरू पूर्णिमा के एक दिन पहले ही आ जाते हैं और शाम को होटल में रूकते है क्योकी उनको जगह नही मिलती। गुरू पूर्णिमा के दिन कई लोगों को सड़क पर ही सोना पड़ता है। गुरू पूर्णिमा के दिन शाम को एक बड़े ट्रक में LCD TV लगाकर पूरी रात गुरुदेव के व्याख्यान चलते रहते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन पूरा शन्तिकुज रंगीन- रोशनी और फूलो से सज जाता है। क्योकी सब कुछ अभी अच्छा गुरुदेव के ज्ञान के कारण ही तो हो रहा है।

 

 

मानसिक तनाव वाले लोग एक बार जीवन में शांतिकुंज हरिद्वार जरूर जाये

शाररिक – मानसिक स्वास्थ्य लाभ के लिए शांतिकुंज आश्रम बेस्ट जगह  है। यहाँ की दिनचर्या में सकारात्मक चिंतन, सादा जीवन, सुपाच्य आहार, प्यार और सहकार से भरापूरा वातावरण, योगमय जीवन, एंव अंत:ऊर्जा के सुनियोजन का समावेश हैं। इसके अलावा गंगातट, हिमालय की गोद एंव हरेभरे वन की निकटता के कारण शान्तिकुंज के वायुमंडल में बिल्कुल प्रदूषण नही हैं। यही स्वस्थ जीवन का  राजमार्ग हैं। अस्वस्थ लोगो के लिए  योग, यज्ञ, वनोषधियो से चिकित्सा व भारत की सभी पुरानी चिकित्सा परामर्श भी उपलब्ध हैं।  निरतंर बढ़ती जिम्मेदारीयो, परिवारिक अशांति अपनी बुरी आदत, सामाजिक अराजकता और आंतक के कारण आज मनुष्य तनावग्रस्त हैं ऐसे में शांन्तिकुन्ज के वातावरण और शिक्षण में जीवन-साधना जीवन को सवारने के ऐसे सूत्र घुले हुए हैं, जिनके अनुपालन से व्यक्ति तनावरहित, संतुष्ट, सुखी जीवन जीने के साथ आत्म संतोष, लोक सम्मान एंव दैवीय अनुग्रह के विषय लाभ प्राप्त करता है।

 

शांतिकुंज क्यों जाए?

1. अगर आपको मानसिक, शाररिक या भावनात्मक विकास की जरूरत हैं।

 

2. आप भारत या दुनिया के किसी भी कोने से यह पोस्ट पढ़ रहे हैं। हमें यह बात अच्छी तरह से पता हैं, की हमारे घर के आसपास वो खूबसूरत, शांतिपूर्ण माहौल नही होता। आपको दिव्य और पृथ्वी का स्वर्ग देखना हैं, तो शांतिकुंज हरिद्वार जरूर जाये।

 

3. मेने वहाँ पर एक मासीय युगशिल्पी साधना सत्र में भाग लिया जिसमें मेने बहुत सारी नई-नई चीजे सीखी जो जिंदगी भर मेरे काम आयेंगी।

 

4.  ध्यान और शान्ति के लिए सबसे अच्छी जगह।

 

5. भारत के ज्यादातर लोगो ने यज्ञ (हवन) नही किया होंगा। यह सपना आपका शांन्तिकुन्ज में पूरा हो जायेगा। और यज्ञ करने के उत्साह आपको आश्रम में आने के बाद ही पता चलेगा।

 

6. मैंने अपने 21 साल के जीवन में एकमात्र जगह ऐसी देखी, जहाँ पर कोई लड़ाई-झगड़ा नही होता । सभी लोग प्यार से बात करते हैं। महिला को माताजी, लड़की को बहन जी, भाई को भैया, और वृद्ध व्यक्ति को बाउजी नाम से सम्बोधित किया जाता हैं।

 

7. शान्तिकुञ्ज की स्थापना ही मनुष्य में देवता के गुण और धरती को स्वर्ग बनाने के लिए हुई हैं। प्रत्येक श्रद्धालु अनुभव करता हैं कि यहाँ आकर उसे जो प्यार मिला , वो कही और नही मिल सकता।

 

8.  यहाँ के साधना शिविरों में भाग लेने वाले परिवारों में निश्चित ही  स्थाई सुख-शांति की वृद्धि होती जाती है।

 

 

शांतिकुंज की सुबह से शाम तक कि दिनचर्या

शांन्तिकुन्ज की दिनचर्या में जीवन को उत्कृष्टता की और ले जाने वाले सद्गुणों का प्रवाह हैं। यहाँ हर साधक हर पल अपने जीवन को नई ऊंचाइयों पर पाता है और आनंदित अनुभव करता हैं। इसके अलावा हर उम्र वर्ग का आदमी आध्यात्मिक ज्ञान से चर्मोत्कर्ष सुख को प्राप्त करता है।

 

● सुबह 3:30 बजे उठना और शाम को 9 बजे सोना।

 

● सुबह-सुबह समाधि- स्थल पर प्रणाम, गायत्री माता मंदिर पर आरती, अखंड-ज्योति दर्शन आदि गतिविधिया।

 

● सुबह 5:30 से से 8 बजे तक निशुल्क यज्ञ ( धोती पहनकर कोई भी धर्म का आदमी हवन कर सकता है)

 

● सुबह 7 बजे से 8 बजे तक माँ भगवती सभागार में योग कक्षा वो भी गुरुदेव श्री राम शर्मा द्वारा बनाई गई देव संस्कृति विश्वविद्यालय के अनुभवी योग शिक्षकों द्वारा।

 

● प्रातःकाल 8:30 बजे भोजन शुरू हो जाता है। गेट नम्बर 4 के पास भोजनालय हैं। देवात्मा हिमालय भवन के पास। सुबह का भोजन दोपहर 1 बजे तक चलता है।  वेसे मेरे अनुभव से देखा जाए तो पूरे दिन चलता है सिर्फ दो घण्टे साफ-सफाई के लिए भोजनालय खाली होता हैं बाकी चार बजे तो फिर से शाम का भोजन शुरू हो जाता हैं।

 

● दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक एक घण्टा श्रमदान गतिविधि, आश्रम को सर्वदा स्वच्छ रखने के लिए।

 

● रात्री भोजन का समय 4:30 से आपके 9 बजे तक।

 

सनातन हिन्दू धर्म के 16 सोलह संस्कार

शांन्तिकुन्ज में हिन्दू धर्म के सभी सोलह संस्कार नि:शुल्क कराये जाते है। सिर्फ आपको वहाँ जाकर  एक फार्म भरना है बाकी सारी प्रक्रिया आश्रम के जीवनदानी/समयदानी आपको बता देंगे। हमारे ऋषियों ने लम्बे शोध  एंव प्रयोग – परीक्षण द्वारा विशेष संस्कारो की परम्परा विकसित की है। इन संस्कारो में जीवन के समग्र एंव तीव्र विकास के लिए एक महत चेतना को आकर्षित करने और मानवीय पुरषार्थ को सही दिशा देने के लिए  यह भारतीय संस्कार करवाये जाते हैं। इस बात पर विचार करे आप चाहे महिला हो या पुरूष या फिर नोजवान जिस भी उम्र, लिंग के क्यों ना हो क्या आपने कभी सोलह संस्कारों को करवाया? मुझे पता है अभी तक आपको नाम भी नही पता होंगा। ये बात मुझे भी नही पता थी क्योकी अच्छी बातें ना तो स्कूलो में सिखायी जाती हैं और ना ही हमारे माता-पिता या अन्य लोगो को परन्तु शांतिकुज में जाने के बाद आप भारत के हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों  से रूबरू होंगे और ये सारे संस्कार अगर आप अपने बच्चों को करवाते हो, तो आपका बच्चा मेधावी, वैज्ञानिक, महान, महापुरुष, एक कामयाब इंसान बनेगा। कुछ संस्कारो के नाम बता देता हूँ अन्नप्राशन, गर्भोत्सव, नामकरण, शिखास्थापना, विद्यारम्भ संस्कार इत्यादी।

 

बच्चों में संस्कारो का विकास ( बाल संस्कार शाला)

अपने बच्चों को संस्कारवान बनाना हर माता-पिता की चाह होती हैं। आज बच्चे टीवी, सिनेमा, मोबाइल, एंव पश्चिमी संस्कृति की चकाचौंध से प्रभावित होकर नशा, बुरी आदते, उदंडता, कामुकता की और बढ़ते जा रहे हैं। हमारी नई पीढ़ी को इन कुसंस्कारों से बचाना बहुत आवश्यक हैं। शांन्तिकुन्ज का आडम्बर एंव पाखण्ड रहित आध्यात्मिक वातावरण एंव उसका विज्ञानसम्मत स्वरूप बच्चों को आकर्षित करता हैं। यहाँ पर उनको हर व्यक्ति से मिलता हैं;- परिवार जैसा प्रेम, बड़ो के प्रति आदरभाव, देश को ऊँचा उठाने का संकल्प, दिव्य वातावरण, प्रवचनों में भारतीय संस्कृति एंव महापुरुषों के  जीवन आदर्शों की चर्चा व उसका जीवंत स्वरूप। जिससे बच्चे इनसे प्रभावित हुये बिना नही रहते। शांतिकुंज में कुछ दिन रहकर उपासना, यज्ञ, संस्कार आदि करने से बच्चों की सोच से नकारात्मकता दूर होती हैं,  उनमें आत्मबल, मनोबल का विकास होता हैं। सच में मेरी यह प्रबल इच्छा है की मेरी संतान को भी मैकाले की शिक्षा पद्ति ने पढ़ाकर सीधा शान्तिकुन्ज में ही बाल संस्कार शाला और शान्तिकुन्ज के गायत्री विद्यापीठ में ही दाखिला दिलाऊंगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है छोटी-छोटी उम्र के बच्चे अनेक कौशल सीख जाते हैं जिससे बड़े होकर वे आत्मनिर्भर भी बन जाते है और सफलता के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचते है।

 

 समयदान करो: पैसा कमाओ: स्वास्थ्य पाओ

समयदान का मतलब होता है- आप अपने समय को किसी स्थान पर दान कर रहे हो। अब आपको कितना समय दान करना है वो आपके ऊपर निर्भर करता है अगर मैं आपसे ये बोलू की समयदान के बदले आपको पैसा भी मिलेंगा और सेहत भी! तो आप का रिएक्शन क्या होंगा? आप खुशी के मारे पागल हो जाओगे। क्योकी समयदान का मतलब शांतिकुंज में नौकरी (job) करना नही बल्की अपने कौशल के मुताबिक सेवा देना है। आपको सुबह 9 बजे जाना है शाम को 5 बजे छूटी वह जिन-जिन विभागों में आप सेवाकार्य करोंगे वहाँ का पूरा स्टाफ बहुत अच्छा है, कोई लड़ाई-झगडा नही होता है आप किसी भी समय कोई काम हो तो सेवाकार्य छोड़कर अपना वो काम कर सकते है क्योकी मैंने शुरुआत में ही आपको बोल दिया ये नौकरी नही ‘ समयदान’ है। इसके अलावा जो लोग शान्तिकुन्ज में समयदान करते हैं उन्हें ‘ समयदानी’ कहते हैं।

 

आप गायत्री परिवार से कैसे जुड़ सकते? और समयदान करने की पूरी प्रकिया को समझे – 

 

शान्तिकुन्ज से जुड़ने का बस एक ही तरीका है आप एकबार ‘हरिद्वार आश्रम’ में आये सभी गतिविधियों में हिस्सा ले और जो-जो यहाँ की गतिविधिया और नियम है उनका घर पर और गायत्री परिवार के शन्तिकुज आश्रम में पालन करे। बाकी और कुछ करने की जरूरत नही है। अब बात करते हैं  SamayDan Ke Pure Process की;-

【स्टेप 1】- सबसे पहले आपको अखंड ज्योति दीप मंदिर के पास बने एक कक्ष में अपना फार्म भरना है। जिसमें वो आपका परिचय पूछेंगे।

 

【स्टेप 2】- फार्म भरने के बाद आपका मेडिकल टेस्ट होंगा और माइंड टेस्ट होंगा की आप वास्तव में किस उद्देश्य से यहाँ पर समयदान करना चाहते हो।

 

【स्टेप 3】- जब आप इस टेस्ट में पास हो जाओगे तो आपको, आपकी स्कील के मुताबिक काम दे दिया जायेगा फिर अगले दिन आप तय समयसीमा के मुताबिक वहाँ पर जाकर काम पर लग सकते हो।

 

 

[मेरी समयदान की कहानी] – 

मेरी समयदान की कहानी (time donation story) बहुत रौचक और भावुक करने वाली भी है। क्योंकी मुझे सिर्फ 15 दिन समयदान करने का मौका मिला वो भी चुपके-चुपके गुप्त रूप से मतलब आप यू समझ सकते हो की, मैं अवैध रूप से पंद्रह दिन रहा और समयदान किया इसके लिए साहित्य स्टोर के बाउजी का बहुत – बहुत ह्रदय की गहराईयो से धन्यवाद क्योकी इन्होंने मेरे उस समय के दुख- दर्द को समझा। साहित्य स्टोर के बाउजी ने ‘समयदान’ का काम देने वाले व्यक्ति’ से व्यक्तिगत रूप से मिलकर बात भी की, बोले की लड़का अच्छा है, और पारिवारिक समस्याओं से झूझने के कारण कुछ दिन रुकना चाहता है। पर वो अगले बाउजी भी बहुत जिद्दी थे, उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया। अंत मैं मुझे साहित्य स्टॉल के बाउजी ने गुप्त रूप से 15 दिन रूकने का मौका दिया फिर मैंने भी काम करने में कोई कसर नही छोड़ी क्योकि मुझे ट्रेडिशनल बिजनेस का अनुभव था और कंप्यूटर का पूरा ज्ञान था। तो मैं एक ऑल-राउंडर की तरह काम करता था इसी वजह से वहाँ का पूरा स्टाफ मेरे से बहुत खुश था। उस 15 दिन के समयदान में हजारो “All World Gayatri Pariwar” के सदस्यों से मिलने का मौका मिला उनसे बात करके बहुत अच्छा लगा। समयदान करने का सबसे बड़ा फायदा यही है, की आपकी आश्रम में एक पहचान बन जाती है दूसरा फायदा भारत के हर राज्यों के लोगो को देखने का मौका मिलता है। तीसरा; आश्रम में रहने वाले सारे लोग आपका सम्मान करते हैं जिससे आपको अच्छी फिलिंग आती हैं तो ये थी मेरी “समयदान” की कहानी।

समयदान की परिभाषा गुरुदेव के अनुसार;-

जीवन का वास्तविक आनन्द व्यक्तित्व के परिष्कार,  आत्मीयता का विस्तार एंव अपनी क्षमताओं में छिपी हुई संभावनाओ के उभार से ही मिलता हैं। इसके लिए सद्गुणों को जीवन में धारण करने की साधना करनी पड़ती हैं। युग निर्माण योजना को साकार करने के लिए लाखो, करोड़ो लोग नित्य 2 घण्टे, सप्ताह में एक दिन से लेकर पूरे जीवन तक स्वेछा से बिना कोई पारिश्रमिक लिये समाज सेवा के लिए देते हैं।  सभी लोगों यह समपर्ण भाव भगवान राम के रीछ-वानर, भगवान कृष्ण के ग्वाल-बाल, गाँधीजी के सत्याग्रहियों जैसा ही हैं।

 

 माँ भगवती भोजनालय और सजल श्रद्धा – प्रखर प्रज्ञा

भारत में आपने सिख धर्म के गुरुद्वारे में लंगर प्रसाद तो खाया ही होंगा?  पर आपको जानकारी के लिए बता दू, भारत का यह पहला हिन्दू गुरुद्वारा है, जहाँ प्रतिदिन 5000 से 6000 लोग सुबह-शाम निःशुल्क भोजन करते है। भोजनालय में किसी के साथ भेदभाव नही होता हैं। सबको पहले अपनी थाली खुद को साफ करनी होती हैं। सारी अच्छी सुविधा उपलब्ध हैं। जो लोग सामान्य हमारे घर में जो मसालेदार, स्वाद वाला भोजन करते हैं वो भी है। और दूसरा भोजन का नाम है, अस्वाद भोजन। मुझे पता हैं, पहली बार इस नये भोजन प्रणाली के बारे में आप जान रहे हो, पर आपको बता दू, गुरुजी ने जीवन भर अस्वाद भोजन ही किया है, क्योंकि यह मानव के लिए सबसे उत्तम भोजन है।

 

अस्वाद भोजन- बिना नमक, बिना मिर्च, बिना शक्कर और बाकी सारी शरीर को खराब करने वाले खाद्य चीजे के बिना मिलावट बनाया भोजन को अस्वाद भोजन कहते हैं। इसमें आपको दलिया, खिचड़ी, रोटी, दाल और एक सब्जी मिलेंगी और हर रविवार को गाय की छाछ।

 

प्रखर प्रज्ञा – सजल श्रद्धा शांन्तिकुन्ज आश्रम में यज्ञशाला के सामने बना हुआ एक स्मारक हैं। जो भी नया व्यक्ति आश्रम में पहली बार आता हैं, तो प्रखर प्रज्ञा सजल श्रद्धा के दर्शन जरूर करता हैं। यही पर गुरुजी का समाधि-स्थल भी हैं।

 

सजल श्रद्धा-  का स्मारक वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा की स्मृति में बनाया गया हैं। और प्रखर प्रज्ञा स्मारक गुरूजी श्रीराम शर्मा आचार्य की स्मृति में बनाया गया हैं।

 

शिक्षण-प्रक्षिक्षण केंद्र

यहाँ से ही आपको आश्रम की सारी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त होंगी। आपको किसी भी प्रकार की समस्या हो तो यहां पर आपको समाधान मिल जायेगा। अगर आपको साधना- शिविर का फार्म भरना हैं, या फिर कुछ दिन शांन्तिकुन्ज में मन की शांति के लिए आप रुकना चाहते हो। तो यहाँ पर बात करके सभी सवालों के जवाब ले सकते हो। और हाँ, जाते ही “बाउजी प्रणाम” अभिवादन जरूर करे। क्योंकी शांन्तिकुन्ज में प्रणाम शब्द बोलने की परम्परा है।

 

शांतिकुंज हरिद्वार शिविर की विशेषताओ का लाभ कैसे ले ?

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तीनो शिविरों के बारे में विस्तृत जानकारी देने से पहले ही बता दूं तीनो शिविर शत प्रतिशत निशुल्क है। मतलब पूरी तरह फ्री है जिसमें रहना, खाना, सोना, पीना सबकुछ शामिल हैं। शांतिकुंज हरिद्वार शिविर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बारे में  आपको इसी पोस्ट में शिविर विभाग के नंबर दिए हुये है, उनसे फोन पर बात करके सारी जानकारी प्राप्त कर ले। और आप ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं तो महीने की 25 से 26 तारीख को जाये क्योंकी हर शिविर महीने की पहली एक तारीख को शुरू होता हैं। शिविर में online apply करने के लिए सारी contact details & websites address इसी पोस्ट में आपको मिल जायेगी। जीवन का कायाकल्प करने वाली शांतिकुंज की विशेषताओ का लाभ यहाँ चलने वाले जीवन साधना सत्रों में भाग लेकर लिया जा सकता हैं।

 

युगशिल्पी एक मासीय साधना सत्र

युगशिल्पी सत्र का मेरा अनुभव बहुत शानदार रहा, मैंने यहाँ पर एक महीने का गुजारा समय जीवन में कभी नही भूल सकता। इस सत्र में मेने योग, ढपली बजाना, मेडिटेशन, गायत्री मंत्र जप, समाजसेवा  के कार्य, अनुशासन-मर्यादा, ब्रह्मचर्य का पालन जैसे बहुत सारी अच्छी चीजे सीखी। जिससे मेरा पूरा जीवन बदल गया। यह शिविर महीने की 1 से 29 तारीख़ के बीच चलता हैं। शिविर खत्म होने के बाद आपको सर्टिफिकेट भी दिया जायेंगा। युगशिल्पी का मतलब- नई दुनिया का निर्माण करने वाला व्यक्ति।

युगशिल्पी शिविर करने के फायदे और मेरा अनुभव ;-

●  भारत के सभी स्टेट से आये हुए नये साधको के साथ एक महीने रहने का मौका मिलता है। जिससे आप उस राज्य की भाषा, संस्कृति, व्यवहार और बहुत सारी काम की चीजें सीखते हैं।

 

● युगशिल्पी साधको को जब भी शांतिकुज में कोई उत्सव होता है तो उसके प्रचार के लिए ‘हरिद्वार शहर में घूमने” का मौका मिलता है तथा आश्रम की अन्य जरूरी गतिविधियों का काम सौपा जाता हैं

 

● एक तरह से कुछ दिनों के लिए आपको विश्व के सबसे प्रसिद्ध आश्रम की अगुवाई करने का मौका मिलता है। आप जो बोलते हो पूरा आश्रम आपकी बातों का पालन करता है। यह अनुभव भी बहुत जोरदार रहता है।

 

● लगभग-लगभग 60 प्रतिशत वो सारी गतिविधियां जो त्रैमासिक शिविर वाले लोगो को सीखाई जाती हैं वह युगशिल्पी को भी सिखाई जाती हैं

 

नोट:-  युगशिल्पी से पहले आपको नो-दिवसीय शिविर करना अनिवार्य है।

 

नौ दिवसीय साधना सत्र

यह 9 दिन चलने वाला छोटा अनुष्ठान सत्र हैं। इस शिविर के अंदर प्रतिदिन 30 माला गायत्री मंत्र जप करना होता हैं। मैने भी इस शिविर में हिस्सा लिया हैं। आपके लिए एक अच्छा सुझाव है, मेरी तरफ से, अगर आप तीस माला जप नही कर पाओ, तो गुरुजी के समाधि स्थल पर जाकर ” 21″ बार माला जप कर देना,  आपकी 30 माला पूरी हो जायेंगी। मंत्र जप के अलावा बहुत सारे संगीत वाले कार्यक्रम होते हैं, आयुर्वेद के महत्व की जानकारी मिलती हैं। बहुत सारे सामाजिक मूढ़-मान्यताओं को दूर करने के अच्छे टिप्स यहाँ पर आप सीखेंगे।

नौ दिवसीय साधना सत्र करने के फायदे और मेरा अनुभव ;-

● अगर आप पहली बार गायत्री परिवार के आश्रम में जा रहे हो, तो शुरुआत आपकी 9 दिन के साधना सत्र से ही होंगी।

 

● इन ९ दिनों में आप आध्यात्मिकता, स्वास्थ्य, मंत्रजप जैसी बहुत सी अच्छी चीजें सीखोगो। पूरे दिन में दो बार चलने वाली संगीत कक्षा जिंदगी के सारे दुखों को दूर कर देती है। मन को पूरी तरह शांत कर देती है।

 

● शिविर का सारा टाइम-टेबल दिनचर्या आपको बता दी जायेगी।

 

त्रैमासिक संगीत प्रशिक्षण सत्र

अगर आपकी रूचि गाना- बजाने में हैं, तो इस तीन महीने के शिविर में जरूर भाग ले। इसमें आपको भारत के सभी मुख्य वाद्य-यंत्र जैसे;- ढोलक, मंजीरा, सितार, आदि बजाना सीख जाओगे। इसके अलावा आप को एक गायक कलाकार बनाना है। तो यहाँ पर बहुत सारे सुर-सम्राट से आपको यह संगीत सीखने को मिलेंगा। यह सत्र भी फ्री है। संगीत शिविर” मैंने नही किया पर वहाँ पर म्यूजिक सीखने वाले लोगो की हर गतिविधि और दिनचर्या पर मैं ध्यान रखता था। इसलिए मुझे सबकुछ पता है की शिविर में क्या क्या गतिविधियां प्रतिदिन होती है। नीचे कुछ Shivir Activitiesदी हुई है जो आप इस तीन महीने के शिविर के अंदर सीखेंगे;-

त्रैमासिक संगीत शिविर सत्र करने के फायदे और मेरा अनुभव ;-

● गीत और भजन कलाकार बनना सीखे :- आपको बहुत सारे प्रसिद्ध कलाकारों के सानिध्य भजन गाना और विभिन्न प्रकार के गीतों को गाना सीखाया जायेगा। जो की आपका अच्छा पैशा भी बन सकता है जिसके जरिये आप अपने गाँव-शहर में जाकर भजन कार्यक्रम करके पैसे भी कमा सकते हैं।

 

● ढपली बजाना सीखें :-
आप इस शिविर के अंदर ही ढपली की सभी ताल सीखेंगे सच में ढपली बजाने का आनंद एक अलग ही होता है अगर आप सीख जाते है तो आपसे गांव/शहर के लोग बहुत प्रभावित होते हैं।

 

● तबला बजाना सीखे :- तबला मास्टर बनना हर संगीत प्रेमी का सपना होता है। क्योकी यह एक गजब की कला है जो बहुत सारे पैसे खर्च करने के बाद वह कडी मेहनत के साथ अभ्यास करने से सीखी जाती है। पर अगर आप तबला बजाना सीखना चाहते हैं तो ‘तीन मासीय’ शिविर का हिस्सा बने।

 

● हारमोनियम बजाना सीखे :- Haramoniyam को राजस्थानी भाषा में ‘पेटी’ बोलते हैं। हिंदी में इस वाद्ययंत्र का क्या नाम है पता नही। इसको बजाना भी आपको सिखाया जायेगा।

 

● सभी प्रकार के बैंड बाजा बजाना सीखे:- अब बैंड में बहुत सारे वाद्ययंत्र आते हैं जैसे ढोल, तासा इत्यादि इनको भी बजाना आपको सीखाया जायेगा।

 

नोट:-  ये शिविर करने से पहले आपको युगशिल्पी शिविर करना अनिवार्य है।

 

आपदा प्रबंधन सत्र

हर महीने की 1 से पांच तारीख के बीच चलता है। इस चार दिवसीय सत्र में आपको भूकम्प के समय अपनी जान कैसे बचानी है। घर में या किसी भी जगह आग लग गई तो उस परिस्थिति में अपने आप को सुरक्षित कैसे रखें। घर में एलपीजी विस्फोटक होने कैसे बचाये इत्यदि जानकारी आप प्राप्त करंगे। इस शिविर का भी आपको एक भी पैसा नही देना है।

 

40 दिन का स्वालम्बन सत्र

ये शिविर आपकी बेरोजगारी और भुखमरी की समस्या को ख़त्म करने वाला साबित होगा क्योकी इस शिविर में आपको ३० से जयदा बिजनेस आइडिया मुफ्त में सिखाये जायेंगे जिससे आप एक आत्मनिर्भर व्यक्ति बन सकते है। अगर आप रोजगार की तलाश में है? तो ये शिविर आपकी जिंदगी बदल सकता है। काश इस तरह का  स्वालम्बन केंद्र भारत के हर गाँव में बन जाये तो बेरोजगारी, भूखमरी की समस्या ही पूरे देश से खत्म हो जाये। पूरी ट्रेनिंग गुरूजी के देव संस्कृति विद्यालय में दी जायेगी जिसकी पूरी जानकारी इसी पोस्ट में आप पढ़ेंगे।

 

शांतिकुज Awgp में यज्ञ चिकित्सा करने के फायदे वह मेरा अनुभव

अभी तक हम सब लोगो ने हवन (Yagya) टीवी में ऋषि-मुनियों को ही करते देखा है। या फिर घर में कोई अति-विशेष कार्यक्रम हो या शादी के समय आपने एकबार यज्ञ किया होंगा। सोचिए, अगर आपको प्रतिदिन दिव्य मंत्रोच्चारण के साथ मुफ्त में यज्ञ चिकित्सा मिले तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होंगी? जाहिर सी बात है, आप खुश हो जाओगे अगर आपके कोई शाररिक या मानसिक बीमारी है तो शान्तिकुन्ज में वैज्ञानिक रूप से (Scientifically) साबित किया है की हर दिन यज्ञ करने से शरीर की सभी बीमारियां खत्म होती हैं। मैंने इस चिकित्सा का भरपूर लाभ उठाया और जबतक शांतिकुंज में रहा तबतक एक दिन भी यज्ञ को नही छोड़ा। कुछ बातों का आप ध्यान रखें।

● अगर आप सुबह 5 बजे शुरू होने वाले यज्ञ में हिस्सा लेते हैं तो आपको बहुत फायदा मिलेंगा क्योकी सुबह पांच बजे से 5:30 बजे का यज्ञ पूरी विधि के साथ होता है जबकी साढ़े पांच बजे के बाद वाला एक यजन राउंड 10 मिनट ही चलता है।

 

● यज्ञ में बैठने के लिए धोती पहननी जरूरी है। अगर आपके पास धोती नही है तो शान्तिकुन्ज से रेडीमेड ख़रीद दीजिए जिससे आपको धोती पहनने में आसानी होंगी। इस धोती को ठीक उसी तरह पहनना है जिस तरह हम पेंट पहनते है। और अगर आपके पास नही है तो आप यज्ञ भवन के पास ही एक छोटा भवन बना हुआ है वहाँ से यज्ञ करने के लिए धोती मांग सकते हैं। बिल्कुल निशुल्क आपको मिल जाएगी लेकिन ध्यान रहे यज्ञ खत्म होने के बाद उन्हें सही समेट कर वापस कर देवे।

 

● हवन करते समय लाइन में खड़े रहे और जूते-चप्पल जल्दबाजी में कही पर भी नही खोले वहाँ पर जूता स्टैंड लगाया हुआ है, उसी के अंदर चप्पल उतारे वरना शांतिकुज के वरिष्ठ लोग या युगशिल्पी साधक अपने हाथ से आपके बिखरे हुए चप्पलों को उठाकर सही रखेंगे और आपको ये दृश्य देखकर शर्मिंदा होना पड़ेंगा।

 

● शुरुआत में आपको कुछ समझ में नही आयेगा इसलिए यज्ञ पांडाल में बैठते ही जो भी यजन करवाने वाली महिलाएं दिशा-निर्देश दे रही है उनका पालन करने के लिए आपके पास बैठे लोगों को देखे, वो किस तरह कर रहे हैं इससे आपको आसनी होंगी।

 

ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान हरिद्वार [Brahmavarchas Research Institute]

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Address
Motichur, Haridwar, Uttarakhand 249411
Time -8am–9pm
: मोतीचूर, हरिद्वार, उत्तराखंड.

ब्रह्मवर्चस शन्तिकुज आश्रम से 2 किलोमीटर दूर गंगा घाट के सामने या फिर यू कहो तो भारत माता मंदिर जाने वाले रास्ते पर बना हुआ है। जहाँ पर शांतिकुज से जुड़े सभी लोगो को मुफ्त में काढ़ा पिलाया जाता है। ब्रह्मवर्चस मुख्य रूप से योग, अध्यात्म वह आयुर्वेद को विज्ञान के साथ जोड़ने का काम करता है। यहाँ पर गायत्री मंत्र पर बहुत गहरा शोध हुआ जिसमें यह पता चला है एकबार गायत्री मंत्र बोलने से आपके शरीर के सभी अंगों पर जबरदस्त अच्छा प्रभाव पड़ता है इसके लिए यहाँ पर एक मशीन भी लगी हुई है। जहाँ पर आपको गायत्री मंत्र बोलना है, और आप प्रत्यक्ष सारे चमत्कार देखेंगे। ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान जाने के फायदे और कुछ कारण है।

1. अगर आपको घूमने का शौक है तो आप जरूर जाए, क्योकी इस संस्थान के अंदर बहुत सारी चीजें देखने लायक है।

 

2. अगर आप शांतिकुंज आश्रम की पोशाक पहनकर जाते हैं और महिला है तो गले में दुपट्टा डालकर जाए इससे आपको हर एक चीज का फायदा मिलेंगा खासकर आयुर्वेदिक काढ़ा पीने का जिसमें गिलोय, अर्जुन, आंवला का ज्यूस और त्रिफला काढ़ा प्रमुख हैं मेरा अनुभव यह है की आप त्रिफला क्वाथ (काढ़ा) पीये क्योकी यह शरीर के सभी रोगों का नाश करता है।

 

3. यहाँ पर गायत्री मंदिर भी बना है शाम को 5 बजे आरती में हिस्सा जरूर ले बहुत शांति मिलेगी और एक चीज मैंने इस मंदिर में देखी की दुनिया के सभी धर्म के बड़े महापुरुषों और गुरुओं ने गायत्री मंत्र की तारीफ में कुछ शब्द बोले है इसका पूरा जिक्र एक तस्वीर में किया गया है इसको भी जरूर पढे और देखे।

 

4. बहुत सारे औषधीय – पौधे भी लगे हुए है  वह गायत्री माता समेत सभी नो देवियों के मंदिर भी बना हुआ है।

 

5. यहाँ पर पांच वैज्ञानिक बैठते है – अब मैं एक काम की बात बताता हूँ, ध्यान से पढ़ना; जैसा की आपको पता है शान्तिकुञ्ज में 10 से भी ज्यादा अच्छी- अच्छी जीवनभर स्वस्थ और निरोग रहने की गतिविधियां करवाई जाती है तो आप यहाँ पर क्या कर सकते हैं की मान लेते है , आपने यह निर्णय लिया की मैं आज xyz date को प्रतिदिन तीन माला गायत्री मंत्र जप करूंगा तो इसका फॉर्म भर दीजिए ब्रह्मवर्चस में और अपना sugar, Bp, वह अन्य शरीर का पूरा Health Checkup करवा दीजिए और चले जाए फिर दस दिन पूरे होने के बाद फिर से इन वैज्ञानिकों के पास आकर अपनी पुरानी हेल्थ-रिपोर्ट दिखाए और फिर से शरीर की जांच करवाये। आप देखेंगे की आपके पूरे शरीर का कायाकल्प ( Total Body Transformation ) हो जायेगा।

 

6. अंत में ‘brahmavarchas shodh sansthan’ के सारे दर्शन करने के बाद इसके सामने ही बहुत खूबसूरत गंगा घाट बना हुआ है उसको देखने जरूर जाये साथ ही इसके आगे ही ‘ भारत माता मंदिर ‘ भी बना हुआ है जो एक Popular Tourist attractions हैं हरिद्वार शहर में।

 

गायत्री विद्यापीठ हरिद्वार

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AddressEmail & phone website
Shantikunj, Haridwar U.K. (249411)
मोतीचूर, मोतीचूर रेंज, उत्तराखंड 249411
9258369708
[email protected]
[email protected]
official link.

गायत्री विद्यापीठ शांतिकुज आश्रम का ही हिस्सा है। यह विद्यालय देव संस्कृति विश्वविद्यालय (Dsvv) में बना हुआ है। इस विद्यालय का भवन Dev Sanskriti Vishvavidyalay होने के कारण हर बच्चे को एक अलग ही आनंद मिलता है क्योकी इसमें बहुत कुछ देखने लायक, सीखने लायक चीजे उपलब्ध हैं। ‘गायत्री विद्यापीठ’ में पढ़ने वाले बच्चे बहुत ही होशियार और होनहार होते है सिर्फ डिग्रियो और अंकतालिकाओ के आधार पर नही अपितु ज्ञान और रियल लाइफ प्रैक्टिकल नोलेज के कारण। मैं कभी – कभी सोचता हूँ;- की काश मेरा विद्यालय बचपन का जीवन गायत्री विद्यापीठ में गुजरा होता। यहाँ पढ़ने वाले बच्चों को शास्त्र और शस्त्र दोनो की कला – कौशल सिखाया जाता है जिससे बच्चा बड़ा होकर कोई भी अपना कैरियर चुनता है तो उसमें बड़ी सफलता प्राप्त करता है। विद्यापीठ के शिक्षक और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक, सुरक्षित, खूबसूरत और अच्छा है।

 

देव संस्कृति विश्वविद्यालय  [Dsvv haridwar]

dev sanskriti vishwavidyalaya haridwar , Dsvv course admission feec distance education,

AddressEmail & phone
DEV SANSKRITI VISHWAVIDYALAYA
Gayatrikunj – Shantikunj,
Haridwar- 249411
Uttarakhand, INDIA.
TEL: 01334-261367 (Ext-5407); FAX- 01334-260723
Timings: 10:00 am to 05:00 pm (Mon. to Sat.)
General Enquiry: +91-9258065555, 9720107192
Admission (Regular Courses):
9258369612 [WhatsApp + Call]
ERP Cell: +91-9258369724 [WhatsApp + Call]
Distance Education: +91-9258369748
DSVV Collage

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार भी शांतिकुज आश्रम का ही एक भाग है। जिसका निर्माण गुरुदेव ने ही करवाया था। पोस्ट के सबसे ऊपर उनका जीवन परिचय दिया हुआ है जरूर पढे। हर पढ़ने-लिखने का शौक रखने वाले लोगो के लिए, युवाओं के लिए  देव संस्कृति यूनिवर्सिटी पहली पसंद है और शांतिकुज आश्रम से जुड़े लोगों को तो अवश्य एकबार जाना चाहिए। यह विश्वविद्यालय, आश्रम से 3 किलोमीटर दूर है जो आप पैदल भी जा सकते हो वरना शान्तिकुन्ज से हर दिन स्कूल बस् जाती हैं तो आप उसमें निशुल्क बैठकर देखने जा सकते हो। बस पूरी खाली जाती है जाने का समय सुबह 6 बजे, शाम दोपहर को 2 बजे जरूर ध्यान रखें। बस संगीत विभाग के सामने ही खड़ी रहती है।

देव संस्कृति यूनिवर्सिटी  में आपके लिए क्या देखने लायक है?

●  आप सोच रहे होंगे हमें विश्वविद्यालय में कोन जाने देंगा तो चिंता की बिल्कुल बात नही है। सामान्य नागरिक नही जा सकता परन्तु जो आदमी शांतिकुज आश्रम में कुछ दिन रूकने आया है या जो ‘अखिल विश्व गायत्री परिवार’ से जुड़ा हुआ है तो उसको किसी भी प्रकार की चिंता की जरूरत नही है। गेट पर खड़े कर्मचारी आपकी धोती और गले में लटका हुआ गायत्री मंत्र चदर दुपट्टा देखकर कुछ नही बोलेंगे।

 

● Dev Sanskriti University Places to visit  :-
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में जब आप घूमने जाये नीचे दिए गए स्थानों को जरूर देखें ये सब यूनिवर्सिटी के अंदर ही बने हुए हैं लगभग 3 किलोमीटर के क्षेत्रफल में ये विश्वविद्यालय फैला हुआ है।

 

#१ श्रीराम शर्मा वाटिका – यह वाटिका पार्क यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के अंदर प्रवेश करते ही लेफ्ट साइड में आपको दिख जायेगी। यहाँ पर आप प्रकृति के कुछ खास चीजो का आनन्द ले सकते हैं वाटिका के अंदर झरना भी लगा हुआ है।  यही पर आप दस रुपये देकर सब्जियों का सूप (vegetables Soup) अंकुरित अनाज, सभी प्रकार के फलों का रस मात्र  Rs.10/- गिलास का आनंद ले सकते हो। वही वाटिका के सामने साहित्य स्टोर है वहाँ पर गुड़ से बनाई हुई 5 रूपये की  स्वादिष्ट सिंग चिक्की खाना  ना भूले।

 

#२  मर्म बिंदु चिकित्सा – एक्युप्रेशर ट्रैक इसी श्रीराम शर्मा वन वाटिका के अंदर लगा हुआ है। इस एक Acupressure Track पर सात अलग-अलग प्रकार के पॉइंटस लगे हुए हैं जिसपर आप हर रोज आधा घण्टा भी नंगे पाँव चलते हैं तो आपके शरीर में चमत्कारिक स्वास्थ्य बदलाव देखने को मिलेंगे क्योकी मर्म बिंदु चिकित्सा के सेंकडो फायदे हैं।

 

#३ ग्रह – नक्षत्र – यह वनवाटिका के थोड़ा सा आगे बना हुआ है जिसमे हिन्दू-धर्म और अध्यात्म का हिस्सा “Planet – constellation” को दर्शाया गया है।

 

#४ गीता भवन – यहाँ पर प्रतिदिन सुबह ग्यारह बजे  श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों की एक कक्षा चलती हैं जिसमें आप हिस्सा ले सकते हैं।

 

#५ आम के पेड़ – देव संस्कृति जाते ही पहला आम का पेड़ श्रीराम वाटिका में ही लगा हुआ है दूसरा जब हम गोशाला और विद्यापीठ जाते हैं तो उस तरफ एक आम का बगीचा है जिसमे सेकड़ो आम के पेड़ लगे हुए है। आप अपना दिमाग लगाकर पेट भरकर आम खा सकते हैं बिना किसी समस्या के।

 

#६ महाकाल मंदिर – यह मन्दिर जहाँ पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए एक पूछताछ का बड़ा भवन बना हुआ है वहाँ पर ही महादेव जी का बड़ा खूबसूरत मंदिर बना हुआ है

 

#७ कैंटीन – देव संस्कृति में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए वह बाहर से आ रहे लोगों के खाने-पीने की वस्तुए मिलती हैं।

 

#८ कचरा निस्तारण (Recycle Plant) – Dev Sanskriti University में बना यह कचरा निस्तारण केंद्र शान्तिकुन्ज आश्रम के सारे कचरे को रिसाइकल करता है और उससे बहुत सारी चीजो का निर्माण करता है। दोस्तो यह बहुत बड़ी बात है आश्रम का एक भी कचरा हरिद्वार को गंदा नही करता है बल्की उसका 100% फिर से पुनः उपयोग के लिए तैयार किया जाता हैं। आप ये प्लाट देखने जरूर जाये बहुत कुछ सीखने को मिलेंगा। उसमें से सबसे बड़ी चीज आप  ये सीखेंगे;- कचरा प्रबंधन (Waste Management) से भी करोड़ो रूपये कमाये जा सकते है!

 

#९  गौशाला – कचरा निस्तारण भवन रोड के दांए तरफ गोशाला बनी हुई है जहाँ पर आप सुंदर गौमाता के दर्शन करेंगे।

 

#१० स्वालम्बन भवन –  अगर आप शांतिकुंज आश्रम से 40 दिन का स्वालम्बन कोर्स  करते हैं तो आपको चालीस दिन लगभग 20 से 30 प्रकार के उद्योग (Business) के आईडीया सिखाये जायेगे। आपको हर काम के बारे में पूरी ट्रेनिंग दी जायेगी। जिसमे लेडीज पर्स बनाना, कपड़े के बैग बनाना, सभी प्रकार के अचार-मूरबो का बिजनेस, अगरबत्ती बनाने का बिजनेस, गाय के गोबर वह गोमूत्र से विभिन्न प्रकार के गोउत्पाद बनाने का बिजनेस। निष्कर्ष यह निकलता है की यहाँ पर भारत वह दुनिया के किसी देश का आदमी, महिला, लड़का-लड़की, गरीब-माध्यम वर्ग आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग ले सकता है। वह यहाँ से व्यापार के गुर सीखकर जाने वाला व्यक्ति बहुत सारे लोगो को रोजगार भी देता है। आत्मनिर्भर भारत बोलने से नही बनता अपितु गुरुदेव द्वारा बनाये स्वालम्बी बनने के केंद्रों के द्वारा बनता है। जब इंसान को बुनियादी सुविधाएं मिल जाती है  फिर तो,  वो चांद-तारे भी तोड़ सकता हैं।

 

 साहित्य स्टोर [ pandit shri ram sharma all books ]

शान्तिकुन्ज में तीन तरह के साहित्य स्टोर या दुकान है जिसमें आप ‘जीवन जीने का ज्ञान’ प्राप्त करोंगे, आप ये मान सकते हो की इस पोस्ट का सबसे अहम ( important & Most useful ) पैराग्राफ यही है।  गुरुदेव द्वारा लिखित ३२०० सत्साहित्य की मुख्य विशेषता यह है की इन्होंने अपनी सभी पुस्तको का दाम इतना कम  रखा की गरीब से गरीब आदमी भी 1000 से 2000 बुक्स आराम से एक साल की बचत की कमाई से खरीद सकता हैं। मेरा ऐसा मानना है की अगर आप गुरुदेव के सारे जीवन की दिव्य शक्तियों को हासिल करना चाहते हैं तो उनके द्वारा लिखित जीवन के हर क्षेत्र पर किताबे जरूर पढे। खाली पूजा-पाठ से कुछ नही होंगा। असली ज्ञान इन ऋषि-मुनियों के ग्रंथ और किताबो में छिपा है।

१.मेगा स्टोर –  इसके अंदर गुरुदेव की सभी  पुस्तकें, सभी वेद और संस्कृत शास्त्रों का हिंदी में अनुवादन की हुई पुस्तकें और बहुत सारी हर दिन उपयोग होने वाली वस्तुए मिलेंगी जिसमें ;- बलिवैश्व यज्ञ, यज्ञ करने का कुंड, स्टिकर, सदवाक्य वाले पोस्टर, सभी प्रकार की माला,
हर्बल औषधियां, प्रज्ञा पेय चायपत्ती,

 

२. छोटा सहित्य केंद्र –  यज्ञ भवन के पीछे दो दुकान लगी है हुई है जहाँ पर कुछ किताबें और घर के लिए उपयोगी सामान आपको मिल जायेगा।

 

३. साहित्य स्टॉल –  ये दो स्टॉल आपको समाधि स्थल के पास और गायत्री माता मंदिर के पास मिल जाएगी वहाँ से आप पुस्तक खरीद सकते हैं।

 

FAQ  [आपके सवाल मेरे जवाब]

हरिद्वार में शांतिकुंज की स्थापना कब की गई?

सन् 1971 में।

गायत्री परिवार का उद्देश्य क्या है?

गायत्री परिवार का उद्देश्य  मानव को देवता बनाना और धरती पर स्वर्ग बनाना। ये बाते आपको माजक लग रही हैं लेकिन जब आप गायत्री परिवार से जुड़ेंगे तो आपको खुद पर विश्वास हो जायेगा की ऐसा करना संभव है।

मेरी उम्र 20, 25, 45, 60 वर्ष है। क्या में शांतिकुंज में आजीवन रह सकता हूँ?

आप चाहें पुरूष हो या महिला, नवयुवक हो या नवयुवती आपको कुछ ना कुछ काम करना तो आता ही होंगा, ऐसे में आप अपने अनुभव व कौशल के अनुसार शान्तिकुन्ज में सेवा देकर जीवनभर के लिए रह सकते हैं।

गायत्री परिवार की स्थापना कब हुई?

सन् 1926 हरिद्वार शहर में।

अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक कौन थे?

युगऋषि, वेदमूर्ति, पंडित, श्रीराम शर्मा आचार्य।

शांतिकुंज हरिद्वार की स्थापना करने वाले कौन है?

पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य।

गायत्री परिवार के नियम

गायत्री परिवार के नियम निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझे;-

● जब तक आप आश्रम में रहेंगे तबतक आपको पूरे दिन धोती-कुर्ता पहनना अनिवार्य है।

● जाती, धर्म, पंथ, सम्प्रदाय इन सब की गायत्री परिवार में कोई जगह नही है संगठन का एकमात्र उद्देश्य मानवता की सेवा करना और  उसके अन्दर छुपी अनगिनत दिव्य शक्तियो को जाग्रत करना है।

गायत्री परिवार का इतिहास

इस आध्यात्मिक संगठन से पूरे विश्व के 30 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं और भारत के हर बड़े शहर और राज्य में गायत्री शक्तिपीठ और प्रज्ञापीठ बनी हुई है जिससे गायत्री परिवार का इतिहास और सारी गतिविधियां देश के हर कोने में हो सके और उसका लाभ हर वर्ग का आदमी उठा सके।

प्रणव पंड्या कौन है?

प्रणव पंड्या, गुरूदेव श्रीराम शर्मा के दामाद है जो वर्तमान में अखिल विश्व गायत्री परिवार का नेतृत्व करते हैं। साथ ही वे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर व शान्तिकुन्ज के मैनेजर भी है।

Ved Mata Gayatri Trust के बारे में बताएं

वेद माता गायत्री ट्रस्ट के अंदर अखिल विश्व गायत्री परिवार (शान्तिकुन्ज) में आया हुआ सारा दान, दक्षिणा व पैसो का हिसाब -किताब होता है। हम कुछ भी अपनी स्वेच्छा से दान करते हैं वो सारा पैसा वेद माता गायत्री ट्रस्ट के बैंक खाते में जाता हैं जो शांतिकुज का ही हिस्सा है।

 

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Training/Shivir/Camps09258360655 / 9258369749
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