हस्तमुद्रा विज्ञान क्या है? हस्त मुद्रा चिकित्सा के फायदे | Hast Mudra in Hindi

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हस्तमुद्रा विज्ञान क्या है? हस्त मुद्रा चिकित्सा के फायदे | Hast Mudra in Hindi

हस्तमुद्रा विज्ञान हमारे सत्य सनातन (हिन्दू) धर्म के स्वास्थ्य पर गहरा शोध करने वाले ऋषियों की एक खोज है। और इसका उपयोग स्वस्थ रहने के लिए विश्व का कोई भी नागरिक, किसी भी धर्म का क्यों न हो, किसी भी जाति का क्यों न हो, वे इसका उपयोग करके अपने ‘स्वास्थ्य लक्ष्य’ को प्राप्त कर सकता है। अगर यही विद्या गोरे वैज्ञानिकों की होती तो इस पर भी पेटेंट लग जाता, आपको इस ट्रिक को पैसा देकर खरीदना पड़ता। लेकिन हमारे ऋषियों ने किसी भी स्वास्थ्य नियमो व तरीको को पेंटेट नही किया। हमारे ऋषियों का मानना था की स्वास्थ्य को कभी व्यापार ना बनाये। ये सबके लिए निशुल्क होना चाहिए।

हस्त मुद्रा विज्ञान क्या है? [What is Hast mudras in hindi]

देखिए इसका नाम हस्त मुद्रा चिकित्सा व Hastmudra विज्ञान दोनो है। लेकिन ज्यादातर लोग इसे हस्त मुद्रा विज्ञान ही बोलते हैं। एक व्यक्ति बहुत कम समय में “मुद्राओ” के जरिए अपनी आध्यात्मिक शक्तियों का विकास कर सकता है। ये मुद्राएं किसी भी समय, किसी भी स्थिति में, सोते-जागते, चलते-दौड़ते इनका अभ्यास किया जा सकता है। इसको महिला-पुरूष, युवा, बच्चे सभी कर सकते हैं।

हस्त मुद्रा चिकित्सा पद्धति किन लोगों के लिए है?

ये मुख्यतः हमारे महान पूजनीय ऋषिओं ने उन लोगो के लिए बनाई है। जो किसी भी प्रकार की चिकित्सा पद्धति से इलाज नही करवाना चाहते। जो लोग बिना किसी शाररिक व मानसिक मेहनत से अपने सभी रोगों को दूर करना चाहते हैं। आलसी लोगो के लिए ‘हस्त मुद्रा चिकित्सा पद्धति’ रामबाण इलाज है।

हस्त मुद्रा के लाभ [ Benefits of hast mudra vigyan in Hindi ]

निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से जानिए हस्त मुद्रा के फायदे;

  1. इसके नियमित अभ्यास से वात, पित्त और कफ की समस्याएँ दूर होती है।
  2. मष्तिष्क, हृदय तथा फेफड़े हेल्दी रहते हैं।
  3. त्वचा चमकदार होती है व आँखों की रोशनी बढ़ती है।
  4. जो व्यक्ति योग व आयुर्वेद का पालन नही कर सकता तथा उसको अपने शरीर की किसी छोटी बीमारी का तुरन्त समाधान चाहिए, तो उन लोगो के लिए हस्तमुद्रा सबसे बढ़िया है।
  5. आपको ऐलोपेथी दर्दनाशक दवाइयां खाने की बजाय  इस आसान और प्रभावशाली तरीको का उपयोग करना चाहिए।
  6. हाथ का अंगूठा हमारे फेफडो से जुड़ा होता है।अगर आपकी दिल की धड़कन तेज है तो हल्के हाथों से अंगूठे पर मसाज करें और हल्का सा खींचे। इससे आपको आराम मिलेगा।
  7. हाथ की पहली अंगुली (तर्जनी) आंतो ( Gastro intestinal tract) से जुड़ी होती है। अगर आपके पेट में दर्द है, तो इस अंगुली को हल्का सा रगड़े दर्द गायब हो जायेगा।
  8. हाथ की दूसरी अंगुली (मध्यमा) परिसंचरण तंत्र (सर्क्युलेशन सिस्टम) से जुड़ी होती है। अगर आपको चक्कर आ रही है या जी घबरा रहा है तो इस अंगुली पर मालिश करने से तुरंन्त राहत मिलेगी।
  9. हाथ की तीसरी अंगुली (अनामिका) आपकी मनोदशा से जुड़ी होती है। अगर किसी कारणवश आपकी मनोदशा अच्छी नही है या आप शांति चाहते हैं तो इस उंगली पर हल्का सा मसाज करें और खींचे। आपको जल्द लाभ मिलेगा। आपका मन(मूड) खिल उठेगा।
  10. हाथ की सबसे छोटी अंगुली (कनिष्ठा) का आपकी किडनी और सिर के साथ सीधा संबंध होता है। इसको मसाज करने से किडनी तंदुरुस्त रहती है। सिर दर्द तुरन्त गायब होता है।

हस्त मुद्रा कब करे? [Best timings for to do hast mudra]

नीचे लिखे कार्य करते समय भी कर सकते हैं एंव सुबह/दोपहर/शाम कभी भी कर सकते हैं।

  • प्राणायाम करते समय करे
  • ध्यान करते समय करे
  • जप एंव साधना करते समय कर सकते हैं।
  • चलते समय व दौड़ते समय भी कर सकते है।
  • रात को सोते समय भी कर सकते है।

योग के साथ हस्त मुद्रा करने के फायदे [ Hast mudra with yoga ]

योग का मतलब होता है आसन व प्राणायाम। जब आप उपरोक्त दोनो के साथ हस्तमुद्रा करते हैं तो आपके शरीर में मौजूद कोई भी रोग (disease) तीव्र गति से ठीक हो जाता है।

हस्त मुद्राएं कितने प्रकार की होती है? (Types of hast mudra in hindi)

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             A to Z Hand Mudras


अब आपके मन में एक महत्वपूर्ण सवाल चल रहा होंगा की मुद्राएं कितने प्रकार की होती है? इसकी कोई निश्चित संख्या नही है। लेकिन आप लगभग 40 से 60 प्रकार की हस्तमुद्रा मान सकते है। मानव हाथ की पांच अंगुलियां शरीर में इन महत्वपूर्ण तत्वों से जुड़ी हुई है। जैसे;-
१. तर्जनी – हवा
२. मध्यमा – आकाश
३. अनामिका – जल
४. कनिष्ठा – पृथ्वी
५. अंगुष्ठ – अग्नि

कुबेर मुद्रा [Most Powerful Hast mudra]

तर्जनी और मध्यमा (पहली व दूसरी) अंगुली
अंगूली को अंगूठे के अग्रभाग (पहला हिस्सा) पर लगाये तथा अनामिका (तीसरी) उंगली और कनिष्ठा ( छोटी उंगली) को मोड़कर हथेली पर लगाये।

Kuber Mudra Karne Ke Fayde

यह मुद्रा ब्रह्मचर्य की शक्ति को बढाने के साथ-साथ आपके लॉ ऑफ अट्रैक्शन के पॉवर को भी बढ़ाता है। इसके अलावा हमारे शरीर की ऊर्जा को संरक्षित (collect) करती है। शरीर की मेंटल तथा फिजिकल दोनो ऊर्जा को बर्बाद होने से बचाती है

ज्ञान मुद्रा (वायु हस्त मुद्रा) कैसे करे?

ज्ञान मुद्रा को वायुमुद्रा और ध्यानमुद्रा भी कहते हैं। तर्जनी अंगूली को अंगूठे के अग्रभाग (पहले भाग) पर लगाये।

Gyan/Vayu/Dhyan mudra benefits
मस्तिष्क से जुड़ी सभी बीमारियां दूर होती है। ध्यान के लिए सबसे लोकप्रिय मुद्रा है। सारे योगी ध्यान मुद्रा लगाकर ही मेडिटेशन करते हैं। इसके अलावा स्मरण शक्ति बढ़ती है, स्नायु तंत्र मजबूत होता है, अनिद्रा का नाश तथा आपके स्वभाव में परिवर्तन आता है। आध्यात्म का विकास होता है एंव पागलपन तक खत्म हो जाता है।

माण्डुकी मुद्रा कैसे करे?

मुँह बंद करके जीभ को पूरे तालू के ऊपर दाएं-बाए तरफ ऊपर-नीचे घुमाए। तालू से टपकती हुई लार को पीएं।

Manduki mudra benefits in hindi
इसका सबसे बड़ा लाभ यह है की आपके वात, पित्त और कफ तीनो की समस्या को ठीक करती है।

 

प्राण मुद्रा कैसे करें?

अनामिका व कनिष्ठा अंगूली को अंगूठे के अग्रभाग पर लगाये। अंगूठे के तीन भाग होते हैं। एक मिनट अपना फोन हाथ से रखकर अपने अंगूठे को देखिए।
Pran mudra karne se kya hota hai?
शरीर की सभी 72 हजार नस-नाड़ियों का शोधन होता है। अगर आप किसी ऐसी जगह में फस गये हैं जहां पर आपको पानी की जरूरत है जोर से प्यास लग गई है या फिर भूख लग रही है और खाना नही मिल रहा है तो आप इस प्राण मुद्राको करना शुरु कर दीजिए। आप पाएंगे की आपकी प्यास और भूख दोनो खत्म हो गई है

 

 नमस्ते मुद्रा – इसमें सिर्फ आपको हाथ जोड़ना होता है। ये मुद्रा तो अपनेआप ही हम जब घर के मंदिर में भगवान को हाथ जोड़ते हैं तब हो जाती है। नमस्ते मुद्रा यानी हाथ जोड़ने से हमारा पंचतत्व नियत्रण होता है। वात, पित्त और कफ तीनो को संतुलित करता है

 

लिंग मुद्रा कैसे करे (Ling mudra in hindi)

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दोनो हाथो को फँसाकर यानी लॉक करके बाएं हाथ का अंगूठा खड़ा रखे। ध्यान रखें हाथ पेट के विपरीत (आगे रहे) अन्य अंगुलिया बंधी हुई हो

Ling mudra benefits in hindi
सर्दी, जुकाम, खांसी, नाक बहना एक दिन में खत्म होता है। लकवा (paralysis) तथा साइटिका जेसी बड़ी बीमारियों से छुटकारा मिलता है। इसको करने से शरीर में गर्मी बढ़ती है। इस मुद्रा को करते समय सभी प्रकार के फलों का सेवन अधिक करे। लंबे समय भूल से ना करे।

 

 यौनि मुद्रा (Yoni mudra in hindi)

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मैं चाहता तो इसकी पूरी विधि लिख सकता था। लेकिन ये विधि जब मुझे ही समझ में नही आयी तो मैं आपके साथ कैसे साझा कर सकता हूँ? इसलिए सिंपल ऊपर की छवि देखकर इसको करे।

Youni mudra benefits in hindi
सकारात्मक सोच का विकास करती है और फेफड़े व हॄदय को स्वस्थ बनाती है।

 

आकाश मुद्रा कैसे करे?

मध्यमा अंगुली को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाये। शेष तीनो उंगलियों को सीधा रखें।

Aakash mudra karne ke labh
कान के सारे रोग खत्म होते है। लेकिन ध्यान रखे जन्म से बहरे-गूंगे होने पर इसका प्रभाव नही होता है। हड्डियों की कमजोरी तथा ह्दय रोग में अप्रत्याशित लाभ होता है।

 

 शून्य मुद्रा के बारे में जानकारी

मध्यमा अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगाये एंव अंगूठे से दबाये। मूल भाग मतलब तीसरा भाग।

Shoonya mudran ke fayde

कान के सब प्रकार के रोग जैसे- बहरापन आदि को दूर करके शब्द साफ सुनायी देता है। मसूड़े की पकड़ मजबूत होती है तथा गले के रोग खत्म होते हैं। थाइराइड रोग भी ठीक होता है।
【सावधानी】– रोग ठीक होने तक ही करे।

 

 पृथ्वी मुद्रा – अनामिका अंगूली को अंगूष्ठ से लगाकर रखे। अंगूठे के पहले भाग पर।

Prithvi mudra के लाभ
शरीर में स्फूर्ति एंव तेजस्विता आती है। दुर्बल व्यक्ति मोटा बन सकता है। वजन बढ़ता है, जीवन शक्ति का विकास होता है। यह मुद्रा पाचन क्रिया को ठीक करती है, सात्विक गुणों का विकास करती है तथा विटामिन की कमी को दूर करती है।

 

 सूर्य मुद्रा –

अनामिका को अंगूठे के मूल (अंतिम) भाग पर लगाकर अंगूठे के पहले भाग से लगाये। इसको आप पदमासन में बैठकर करते हैं तो अधिक लाभ मिल सकता है।
Surya mudra benefits
● शरीर संतुलित होता है, मोटापा कम होता है।
● तनाव में कमी तथा शक्ति का विकास होता है।
● मधुमेह, जिगर(लिवर) रोगों दोषो को दूर करती है।

【सावधानी】– दुबले व्यक्ति इसे ना करे। गर्मी में ज्यादा समय इसे ना करें।

 

वरुण मुद्रा की विधि छोटी उंगली को अंगूठे से लगाकर मिलाये।

Varun mudra benefits in hindi 

  • यह मुद्रा शरीर में रूखापन नष्ट करके चिकनाई बढ़ाती है। चमड़ी मुलायम तथा चमकीली बनती है।
  • चर्मरोग, रक्तविकार एंव जल-तत्व की कमी से उत्पन्न व्याधियों को दूर करती है।
  • मुहांसों को नष्ट करती है और चेहरे को सुंदर बनाती है।

 अपान मुद्रा क्या है इसे करने की विधि

पहली अंगुली को अंगूठे के मूल(तीसरे) भाग पर लगाये रखे उसके बाद दूसरी व तीसरी अंगुली को अंगुष्ट के अग्रभाग पर लगाये। ये दोनों किर्याए साथ-साथ करे।

Apaan mudra benefits in Hindi

  • शरीर व नाड़ी की शुद्धि करता है।
  • मल दोष नष्ट होते है। बवासीर (मस्सा) दूर होता है।
  • वायु विकार, शूगर, मूत्ररोग, गुर्दों का दोष, तथा दांतो की समस्या दूर होती है।
  • शरीर में आरोग्यता का विकास होता है तथा ह्दय रोग में फायदा होता है
  • गठिया रोग में लाभ होता है। दिल का दौरा पड़ते समय तुरन्त ये मुद्रा करने पर आराम मिलता है।
  •  

सहज शंख मुद्रा

दोनो हाथो की अंगुलियों को आपस में फंसाकर हथेलिया दबाएं। फिर दोनों अंगूठो को मिलाकर तर्जनी उंगली को हल्के से दबाए। दिन में 15-15 minute तीन बार करे।

Sahaj Shankh Mudra के फायदे

जिन लोगो को हकलाहट (stammering) की समस्या है वे लोग इसको उठते-बैठते जागते-सोते करने की आदत डालें। आपकी आवाज मधुर और स्पष्ट हो जायेगी। हकलाने के साथ तुतलाना भी ठीक होता है। 

 

 शक्तिपान मुद्रा – 
दोनो हाथ के अंगूठे और तर्जनी अंगुली को इस तरह मिला ले, जिससे खाने वाले पान के पत्ते की आकृति बन जाये। इसके बाद दोनों हाथों की बचीतीनो अंगुलीयो को हथेली से लगा दे। लाभ ब्रेन पॉवर बढ़ता है

 

 पुष्पांजलि मुद्रा –
पुष्प यानी फूल। पुष्प अर्पण करते समय व भगवान से कुछ मांगते समय आपके हाथ जेसे रहते है वेसे ही ये पुष्पांजलि मुद्रा बन जाती है। विधि- दोनो खुली और सीधी हथेलियों को अगल बगल में सटा कर रखें।

फायदे
नींद अच्छी आने लगती है तथा आत्मविश्वास बढ़ता है।

 

 पुस्तक मुद्रा

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कम समय में ज्यादा विद्या ग्रहण करने के लिए। कोई भी पुस्तक(Books) जल्दी समझ में आ जाती है।

जलोदर नाशक मुद्रा –
सबसे छोटी उंगली को अंगूठे के जड़ में लगाकर
उसी अंगूठे से दबाए।

लाभ
जल तत्व की अधिकता से होने वाले सभी रोगों को खत्म करती है। सूजन व जलोदर नामक बीमारी खत्म होती है। रोग ठीक होने के बाद नही करे।

शंख मुद्रा – 
बाँये हाथ के अंगूठे को दोनो हाथ की मुट्ठी में बंद करे।

Shankh mudra karne ke fayde
गले व थाइरॉइड ग्रन्थि पर सकरात्मक प्रभाव पड़ता है। पाचन क्रिया में सुधार होता है, आंत व पेट के नीचले भाग के विकार दूर होते है। वाणी संबंधित सभी दोष दूर होते हैं।

हंसी मुद्रा –

तर्जनी, मध्यमा, अनामिका तीनो को एक दूसरे से सटाकर रखे, उसके बाद अंगुष्ठ को मध्यमा के मध्य में लगाये और हल्का सा दबाए। हम जब यज्ञ में आहुति देते है तो यही मुद्रा बनाते है।

Hansi mudra ke labh
शरीर में हल्कापन महसूस होता है। धन प्राप्ति दिखती है जीवन के विभिन्न कार्यों में विजय मिलती है।

असंयुक्त हस्त मुद्रा के बारे में जानकारी

हाथ और उगलियों से बनने वाली ये मुद्राएं लगभग 55 से 100 होती हैं और आंतरिक भावनाओं को व्यक्त करने के लिए, इन मुद्राओं को दो पार्ट में डिवाइड किया गया है, पहला असंयुक्त हस्त (एक हाथ की मुद्रा (32 मुद्राएं)) और दूसरा संयुक्त हस्त (दोनों हाथ की मुद्रा (23 मुद्राएं) इसका उल्लेख भारत के नाट्यशास्त्र ग्रंथ में मिलता है।

 रोगानुसार मुद्राएं

अभी आपको कुछ महत्वपूर्ण बीमारियों के लिए स्पेशल हस्तमुद्रा के बारे में बताता हूँ।
१. Stammering – सहज शंख
२.For cough – लिंग तथा सूर्य मुद्रा।
३.Blood Related Disease – वरुण, प्राण तथा अपान मुद्रा।


【नोट】- बाकी शरीर की सभी रोग के लिए मुद्रा देखने के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़े। आप शुरुआत से अंत तक पढ़े “हस्तमुद्रा विज्ञान” से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।

 

हस्तमुद्रा करते समय सावधानी व ध्यान रखने योग्य बातें [नुकसान/हानि]

  • योगमुद्रा करने के बाद फल व फलो का ज्यूस ज्यादा पीए। कुछ मुद्राएँ लंबे समय
  • कुछ योग मुद्राएँ 30 मिनट से अधिक ना करे। जिनके बारे में ऊपर जानकारी दे दी गई है।
  • एक हाथ से करने पर इतना फर्क नही पड़ेंगा। पूर्ण लाभ के लिए दोनो हाथो से करे।
  • चिंता, दुख, गुस्से में ना करे।
  • मुद्रा में ऊँगलीयों को स्पर्श करते समय दबाव हल्का और सहज होना चाहिए। शेष ऊँगलीयां तान कर रखने की बजाय सहज भाव से सीधी रखे।

Hastmudra Vigyaan FAQ in Hindi

प्रश्न) हस्त मुद्रा को हिंदी में क्या कहते हैं

उत्तर- हस्त मुद्रा एक संस्कृत शब्द है इसका हिंदी में मतलब होता है अपने हाथ की अंगुलियों को मोड़कर या एक दूसरे से जोड़कर अलग-अलग मुद्रा का निर्माण करना।

प्रश्न) हस्त मुद्रा शास्त्र का नाम क्या है?

उत्तर- हमारे स्वास्थ्य पर चिंतन व शोध करने वाले ऋषियों ने घैरण्डय संहिता, शिव संहिता, हठ योग तथा प्रदीपिका में मुद्राओ को विशेष स्थान दिया गया है।

हस्त मुद्रा को कितने नामो से लोग उच्चारण करते हैं? 
Yog mudra, Hand Mudra,


आज आपने ‘इंटरनेट ज्ञानकोष’ ब्लॉग पर स्वास्थ्य से जुड़ी एक नई विद्या सीखी जिसका नाम है हस्तमुद्रा विज्ञान। पोस्ट को हर भारतीय के साथ साझा करें व ऋषिओं के इस ज्ञान को सोयी हुई जनता को बताए। अपने विचार नीचे ब्लॉग कमेंट बॉक्स में लिखे।

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