जब इंसान मौत के करीब होता है तब वो कैसा महसूस करता हैं? मृत्यु से पहले क्या होता है?

जब इंसान मौत के करीब होता है तब वो कैसा महसूस करता हैं? मृत्यु से पहले क्या होता है?

ये पोस्ट में अपनी परदादी यानी मेरी दादी की माँ के रियल लाइफ घटनाक्रम से लिख रहा हूँ ताकि आप वो दर्द और भावनाओं को महसूस कर पाए जो मैंने उनकी मृत्यु के कुछ दिन पहले किया। हर इंसान जो जीवन का असली सच जानना चाहता है या फिर मौत से ठीक पहले महिला-पुरूष कैसा महसूस करता है उसके बारे में जानना चाहता है तो नीचे दिए गए सभी उपबिन्दु को पढ़कर थोड़ी देर अपने आप को उस स्टेट तक ले जानी की कोशिश करें। विश्वास मानिए इस पोस्ट को पूरा पढे क्योकी आप किसी न किसी कारण से इसको खोला हो, आपके मन के कुछ सवालों का जवाब भी इसमें मिल जायेगा।

अपना आपा खो देते है

अपना आपा खो देने का मतलब है की वह इंसान पागलपंती करने लगता है। उल्टी-सीधी हरकते करने लगता है। जेसे – आपके हाथ कोकाटना, रोना, जोर-जोर से अलग-अलग आवाज निकालना इत्यादी। ऐसे में जो भी परिवार का सदस्य उसके पास बैठकर उसका खयाल     (देखभाल) करता है वो डर जाता है की यार ये क्या हो गया। देखभाल करने वाला खुद तनाव में चला जाता है। ऐसे में यह पीड़ा उस इंसान की बहुत दर्दनाक होती है।

उसके सारे अंग काम करना बंद कर देते हैं

ये बात आपको भी पता है ज्यादातर जो लोग जो दुनिया में मरते हैं उनमें से 90% वे महिलाएं और पुरुष होते हैं जो किसी न किसी मेडिकल ट्रीटमेंट को ले रहे होते हैं ऐसे में वे अंग्रेजी दवाईयां इतनी खतरनाक होती है। जिससे की मरीज अपने बोलने की क्षमता तक खो बैठता है ये सभी अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ। इसलिए आप भी अगर एलोपैथी दवाईयों का सेवन कर रहे हैं तो आज ही छोड़ दें वरना आपका भी नम्बर ऐसे ही आयेगा।

अपने परिवार के लोगो के नाम पुकारता है

जब कोई व्यकि मौत के बहुत करीब होता है तो वह नानी, मम्मी (माताजी), दादी या जो भी उसका सबसे प्रियजन होता है उसका नाम लेता है। आपको पता है वो व्यक्ति ऐसा क्यों करता है? क्योकी जब वो इनका नाम पुकारता है तो उसका दर्द थोड़ा कम होता है। उसकी आवाजे कुछ इस प्रकार की होती है, है भगवान बचा ले, है मम्मी, है पापा, अब क्या करूँ…. इस तरह की अलग-अलग आवाजे निकालकर अपने दुख को दूर करता है।

खाना-पीना छोड़ देता है

यह बात सच है की जब इंसान मौत के बहुत करीब होता है तो 99% सीरियस लोग खाना-पीना छोड़ देते हैं। वही कुछ क्षेत्रो के लोग परिवार के किसी सदस्यों की लड़ाई के कारण उनसे नाराज होकर ही खाना पीना छोड़ देते हैं। ऐसे में भूख से ही उसके प्राण निकल जाते हैं। दूसरी स्थिति यह होती है की वह इंसान भोजन भी करता है तो बहुत कम उसको कुछ भी अच्छा नही लगता।

Death से पहले घटनाक्रमों पर मेरे अंतिम विचार

यही नहीं ज्यादातर वृद्ध महिलाओ और आदमियों को अपना मल-मूत्र भी अपने कपड़ों के अंदर ही त्यागना पड़ता है। इसकी बहुत वजह होती है जैसे- दोनो घुटने फैल हो जाना, शरीर की कोई हड्डी टूटना आदि। ऐसे में जब आप अपने परिवार या किसी भी चाहने वाले लोगो के उनके अंतिम दिनों में साथ में रहते हो तो आपको बहुत बड़ा झटका लगता है आपके दुख कम होते जाते हैं। आप उससे बहुत कुछ सीखते हैं।

 

इस पोस्ट को हर उस व्यक्ति के साथ शेयर करें जिसके परिवार में कोई परिजन,दोस्त या रिश्तेदार मौत के अंतिम दिनों में जी रहा हैं। इससे उस पुरुष-महिला को थोड़ी हिम्मत मिलेंगी। अगर आप भी अपना अनुभव या विचार प्रकट करना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करे।

 

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