Health tips in Hindi – cure disease through Ayurveda, homeopathy, naturopathy, plant-based food and yoga

Health tips in Hindi – cure disease through Ayurveda, homeopathy, naturopathy, plant-based food and yoga

बीमारी क्या है और हम बीमार क्यों पड़ते हैं? ये दोनों अलग सवाल है, और ये दोनों सवाल चाहे वह आम आदमी हो या बहुत ज्यादा अमीर उनके दिमाग में तब आते हैं, जब उनके शरीर की हालत बहुत ज्यादा खराब हो जाती है या उनको कुछ महीनों बाद ही अपनी मौत साफ- साफ दिखती हैं और  दुःख की बात यह है चाहे वह भारत देश हो या दुनिया का कोई भी देश यह अमूल्य ज्ञान (हैल्थ नॉलेज) किसी भी विद्यालय या विश्वविद्यालय में नही सिखाया जाता। इसके अलावा यह ज्ञान हमारे रिश्तेदार, पड़ोसी, परिवार व यहाँ तक दोस्तो को भी सम्पूर्ण ज्ञान नही होता। ऐसे में जाहिर सी बात है, हमारी यह स्थिति तो होनी ही है। लेकिन आप आज चिंता की बात ना करें, जो होता है, अच्छे के लिए होता है। आज आप उस इंसान से हैल्थ नॉलेज ले रहे हैं, जिसने स्वास्थ्य से संबंधित सभी बीमारियों का कारण और रोकथाम के नियमो को सीखने में कुल 3 तीन साल का समय लगाया। तो आप निश्चित होकर पूरी पोस्ट पढे और पढ़ते- पढ़ते आपको पोस्ट बहुत ज्यादा ‘उपयोगी’ लगे तो इसको सभी के साथ शेयर कर दीजिए क्योकी मेरा ऐसा मानना है, 99% लोगो को यह “हेल्थ एजुकेशन” नही होता इसके अभाव में ये लोग अपने जीवनभर की खून-पसीने की कमाई एक बीमारी को खत्म करने में लगा देते हैं।

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 बीमारी की परिभाषा

जब व्यक्ति कोई भी शाररिक व मानसिक काम करने योग्य नही रह जाता तब उसे ‘बीमार व्यक्ति’ कहते हैं। बच्चा, बूढ़ा, जवान, लड़का-लड़की, पुरूष-औरत सब लोग बचपन से लेकर मृत्यु तक कभी न कभी बीमार पड़ते ही है। दूसरी परिभाषा यह है, की जब मनुष्य का किसी काम में मन नही लगता या हर समय वह निराशा में डूबा रहता है, तब भी आप उसे ‘रोगी’ कह सकते हैं।

रोग की जड़ व बीमार पड़ने के कारण

सबसे पहले आपको विश्व की सबसे प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के माध्यम से रोग क्यों होता हैं उसके बारे में बताता हूँ, फिर कुछ अन्य कारण बताता हूँ।

● पहला कारण –

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में ‘ वात-पित्त- कफ ‘ (vata- pita – kapha) का संतुलन बिगड़ जाना ही सभी रोगों की शुरुआत का कारण है। अब बात आती हैं, ये वात-पित्त और कफ आखिर है, क्या बला? तो आपको इस अध्याय को समझने के लिए महर्षि वाग्भट जी  द्वारा लिखित दो ग्रंथ ” अष्टांग हृदयम और अष्टांग संग्रहयम [Ashtang Hridayem and Ashtang sangrahyam]  को पढ़ना होंगा। जो बाजार में किसी पुस्तक की दूकान या ऑनलाइन आसानी से मिल जायेगी।

● दूसरा कारण –

खानपान है। मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ, अगर आपको यह ज्ञान हो जाये की क्या चीजे खानी है, और क्या नही तो आप कभी बीमार नही पड़ सकते हैं। क्योकी एक प्रसिद्ध Health Quote है, की इंसान अपनी कब्र जीभ से खोदता है। कुछ ऐसी चीजो के बारे में आज मैं आपको नाम बताऊंगा जो शत प्रतिशत जहर है, और आप उसको शौक- शौक में मजे के साथ हर दिन खाते हैं।

१.) डेयरी उत्पाद –  बाजार की डेयरी या अन्य किराने की दुकान  में उपलब्ध सभी प्रकार के डेयरी प्रोडक्ट्स हमारे शरीर के लिए उत्तम नही है इनके बारे में अधिक जानकारी के लिए, नीचे प्राकृतिक इलाज करने वाले डॉक्टर बिस्वरूप चौधरी की पोस्ट पढे;-

२.) अचार, मुरब्बा, रिफाइंड तेल, चाय, अंग्रेजी दवाई (मेडिकल पर मिलने वाली), शक़्कर, नमक, मैदा, बाजार की मिठाई, चित्र-विचित्र पकवान, पावभाजी, कचोरी, समोसा, जलेबी (सभी फास्टफूड), एल्युमिनियम में पक्का भोजन , ये सब चीजें आपने जाने-अनजाने में कभी न कभी तो जरूर खाई होंगी और इनमें से ज्यादा नही तो दस प्रतिशत चीजें तो आप हर दिन खाते ही होंगे या अपने घर में परिवार को खिलाते ही होंगे। अगर आप इन सब चीजो के बारे में और विस्तार में जानने के इच्छुक हो, तो नीचे दी गई अमर बलिदानी राजीव दीक्षित जी की पोस्ट पढे;-

जानिए जहरीले रिफाइंड तेल, चाय और अंग्रेजी दवाइयों के नुकसान 

● तीसरा कारण बीमार पडने का –

चिकित्सा पद्धति का गलत चुनाव करना। दुनिया के नब्बे प्रतिशत लोगो को यह बात पता ही नही है, की बिना ऑपरेशन और बिना शरीर के चीड़ फाड़ किए भी किसी रोग का इलाज किया जा सकता हैं। आज के समय में किसी भी बीमारी को ठीक करने की सबसे लोकप्रिय थेरेपी है – अंग्रेजी हॉस्पिटल, मेडिकल और एलोपैथी दवाओं के द्वारा मनुष्य का इलाज करना। पर जब आप खुद से इस विषय पर अनुसंधान करेंगे तो आप पायेंगे इस चिकित्सा पद्धति से इंसान की उम्र कम होती है, ये रोग को खत्म नही करती अपितु उसको दबा देती है, या छुपा देती हैं, उसके दर्द के सिग्नल को काट देती हैं। और आपको लगता है, मैं ठीक हो गया। एलोपैथी इंसान को मूर्ख बनाकर धन कमाने का एक जरिया बन चुका है। ये सब मैंने allopathy ke nuksan आपको बताए, इससे ज्यादा भी ओर बहुत सारी बाते है एलोपैथी की,  जो इस पोस्ट में बताना संभव नही है।

 

कितने प्रकार के  रोग ( बीमारी) होती हैं?

आज से 20 साल पहले सन्  2002 में 100-500 बीमारी थी।  वही हमारे प्राचीन भारत की बात करे तो मुश्किल से दस या बीस बीमारी थी। पर आज यह आंकड़ा बहुत डराने वाला है क्योकी आज बीमारियों का आंकड़ा [ 30,000+ disease ] तीस हजार पार कर चुका है। इनमे भी कुछ रोग ऐसे है, जिनको अभी तक नाम भी नही दिया गया। अब बात करते हैं, कितने प्रकार की बीमारियां मनुष्य को होती हैं;-

1. मानसिक –  मानसिक रोग का मतलब दिमागी संतुलन बिगड़ने से आयी हुई समस्याएं या फिर दिमाग के अंदर गहरी चोट लग जाना या किसी प्रकार के परिवार/समाज / दोस्त/ रिश्तेदारों के लड़ाई-जगड़े से उतपन्न तनाव और टेंशन भी मन की बीमारी के अंदर ही आते हैं। इसे अंग्रेजी में ‘ मेंटल डिसऑर्डर या मेंटल प्रॉब्लम कहते हैं’

जानिए मानसिक रोग होने के कारण वह आपका भी माइंड टेस्ट करे, कही आप भी इसकी चपेट में तो नही? 

2. शारीरिक –  शारीरिक बीमरियों का मतलब ऐसी कोई बीमारी जो शरीर के बाहरी हिस्से पर  हुई हो और वह सबको दिखती हो। जैसे;- कही दुर्घटना में चोट लग जाना, त्वचा रोग (स्किन प्रॉब्लम)  होना, आंखों की समस्या  इत्यादि।

3.  महामारी /  दूषित वातावरण से फैलने वाली –
ये डिजीज अक्सर  गंदे व प्रदूषित वातावरण से फैलती है। उदाहरण के लिए;- आपके मोहल्ले में किसी गड्ढे में पानी भर जाए और आप उसे दस दिन लगातार ऐसे ही रहने दे, तो वहाँ पर मच्छर पनपने शुरू हो जायेगे और फिर डेंगू, मलेरिया जैसी मच्छरजनित रोग आपको वह पूरे मोहल्ले को होंगे। इसके अलावा कोई जितना हो सके प्लास्टिक बैग उपयोग करना बंद कर दे वरना हमारी आने वाली पीढियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी क्योकी प्लास्टिक पॉलीथिन थैली से इंसान तो बीमार हर दिन हो ही रहा है पर क्या आपको पता है? हर दिन पूरी दुनिया में लाखों/करोड़ो छोटे-मोटे जीव-जंतु, पशु-पक्षी प्लास्टिक के कारण मरते हैं।

4.  पशु-पक्षियों से फैली बीमारी –  यह रोग अक्सर मृत पशु – पक्षियों के कारण वातावरण में फैलता है। दूसरा कारण जीभ के स्वाद के लिए भारी मात्रा में बेजुबान जानवरो को मौत के घाट उतारना। अक्सर मांस खाने वाले लोगों की आयु कम ही होती है, या वो किसी भी समय उनका धरती से पता कट हो सकता हैं। यह प्रकृति का नियम है। माँसाहार जानवरों के लिए बना है, इंसानों के लिए नही।

 

 क्या हर बीमारी का इलाज संभव है?

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जब दुनिया में हर समस्या का समाधान उपलब्ध हैं  तो बीमारी का क्यों नही ! इसका मतलब यह है, की दुनिया में जिस आसाध्य /लाइलाज बीमारी का ट्रीटमेंट डॉक्टर ने करने से मना कर दिया हो, डॉक्टर ने मरीज के परिवार को बोल दिया हो,  की अब इनको आप घर पर लेकर जाये और इनकी सेवा करे, इनकी हालात बहुत गंभीर है। अब इनको भगवान भी नही बचा सकता। तो आज मैं, इन सब सामाजिक धारणाओं को तोड़ दूंगा। और आपको वह सारी ट्रिक, टेक्निक, मेथड, ज्ञान दूंगा जिसके जरिये आप किसी भी बीमारी का इलाज घर बैठे, बिना किसी चिकित्सक की सलाह के अपने स्वास्थ्य ज्ञान की बदौलत कर सकते हैं। आइये इन सब बातों को नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से समझते हैं।

● कोई भी शरीर में रोग हो जाये तो सबसे पहले एक बात का ध्यान रखे, उसके निदान के लिए तुरन्त मेडिसिन/दवाई ना दे। (चाहे वह कोई भी पैथी हो या चिकित्सा पद्धति। हमेशा ध्यान रखे, रोग हमारे मित्र होते हैं, शत्रु नही।

नोट:- इस कहावत मतलब ये बिल्कुल नही है, की आप लापरवाह हो जाये और उस तकलीफ के सही उपचार के बारे में सोचे ही ना।

● कोई भी रोग आ जाए रोगी (मरीज) को सात दिन तक घर का खाना और बाजार में मिलने वाला भोजन बिल्कुल ना खिलाये। इसकी जगह आप सिर्फ तीन-चार प्रकार के सभी मौसम के अनुसार फल या रोगी के पसंद के फल भरपेट खिलाये वह पानी की जगह नारियल पानी या कोई भी फ्रूट जूस पिलाये। [ आप साक्षात् ऊपरवाले की प्राकृतिक दवाई का चमत्कार देखेंगे! ] फल फ्रूट्स मनुष्य के लिए सर्वोत्तम आहार है।

● अगर मरीज  की बहुत ज्यादा तबीयत खराब है, तो आपातकाल की स्थिति है या मरने-जीने का सवाल है, तो उसे तुरंत आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में लेकर जाये। आप गूगल पर ‘near by best ayurvedic hospital’ सर्च करेंगे तो आपको एक से बढ़कर एक अस्पताल दिख जायेगे। आयुर्वेदिक इसलिए, क्योंकी यहाँ पर रोग को खत्म किया जाता हैं। वही उलट आप एम्बुलेंस बुलाकर अंग्रेजी अस्पताल में भर्ती करवायेंगे, तो आपके परिवार के सदस्य की जान आपको ‘ राम भरोसे’ छोड़नी पड़ेंगी। या हो सकता है कुछ समय तक विभिन्न अत्याधुनिक सुविधाओं व औजारों के साथ आपके सदस्य को जिंदा रख दे पर उसके बाद कितने दिन तक वह रोगी जिंदा रहेंगा इसकी गारंटी कोई एलोपैथी चिकित्सक (अंग्रेजी डॉक्टर)  नही ले सकता।

नोट:- यह सारी बाते तीन साल के गहरे रिसर्च और आपबीती घटना के आधार पर बोल रहा हूँ अगर आपको इस लेख से कोई भी आपत्ति है, तो मुझसे नीचे ‘कॉन्टेक्ट पेज’ में जाकर सम्पर्क करें।

● ज्यादातर लोग या रोगी के परिवार सदस्य मरीज के साथ वह व्यवहार करने में या माहौल बनाने में असफल हो जाते हैं, जो उसको चाहिए। जब आपके घर में कोई बिमार हो, तो  उसके साथ थोड़ा हँसी-माजक करे, उसके साथ अच्छी बातें करें, उसको पॉजिटिव रखें, नकारात्मक विचारों से दूर रहे, उसका ढांढस बढाये, जबतक वो ठीक न हो जाये, एक सदस्य 24 घण्टे उसके साथ रखें, ऐसा करने से वह जल्दी सही हो जायेगा। क्योकी प्यासे को पानी चाहिए, आप भले उस समय उसको पानी ना देकर कितने भी पांच पकवान परोस दो वह उसको नही खायेगा।

● क्या आपको पता है? हमारे देश भारत में अभी भी देशी इलाज करने वाले वैद्य ( आयुर्वेदिक/होम्योपैथी डॉक्टर) मौजूद हैं। जो आपके अस्पताल ( Hospital)  के लाखो रूपये के खर्चे और दवाइयों को बड़े-बड़े बिलो को बचा सकते हैं। इसकी ताजा घटना मेरे घर की ही है। मेरी दादीसा के दाएं पैर के जांघ की हड्डी टूट गई, एलोपैथी इलाज में मेरे दादाजी और अंकल ने लाखों रुपए खर्च किये, पर कोई इलाज सफल नही हुआ, उसके बाद किसी देशी वैद्य को बुलाया उसने तीस हजार रुपये लेकर दो बार पट्टा बांधा कुछ औषधिया और जड़ी बूटियों को मिलाकर और वह टूटी हड्डी जुड़ गई और आज मेरी दादी फिर से चलने लगी।

निष्कर्ष;- अब तो आपको यकीन हुआ न की कुदरत के नियम और हम प्रकति के साथ चलेंगे तो
हमारा कुछ नही हो सकता। हम भी सभी पशु- पक्षियों की तरह निरोग जीवन जीयेंगे। और जब मौत आयेगी उसी समय मरेंगे, किसी बीमारी के कारण नही!!!! लेकिन रुकिए…. कुछ काम की बाते और बाकी है, पूरी पोस्ट पढे, आपको पढ़ने में एक घण्टा ही लगेंगा, लेकिन लिखने वाले लेखक (यानी मैं) ने पूरा एक दिन लगाया है, इस पोस्ट को आप तक पहुचाने में।

 

 चिकित्सा पद्धतियो के नाम जो हर लाइलाज बीमारी को ठीक करती हैं

ऐसे तो हजारो ट्रीटमेंट, पैथी और चिकित्सा पद्धति हैं। जिससे आप नेचुरली अपनी बॉडी को फिर से जीवित कर सकते हैं पर मैं, आपको यहाँ पर वही बताऊंगा, जिसका मैंने खुद ने इस्तेमाल किया है और उसका मुझे अच्छा परिणाम मिला है। और ये थेरेपी हर उम्र के व्यक्ति के लिए कारगर साबित होंगी। तो चलिए शुरू करते हैं:

1. आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति [Aayurvedic/Ayurveda]

अंग्रेजी में आयुर्वेदा व आयुर्वेदिक बोलते है। इसके इलाज की यह खासियत है, की यह दुनिया की पहली ऐसी पैथी है, जो बोलती हैं और हमे सीखाती हैं, की बीमार ही मत पड़ो। सुनकर अच्छा लगा ना?  आयुर्वेद कहता है, अपना पेट हर दिन साफ रखो किसी का बाप आपको बिमार नही कर सकता। और एक और विशेषता इसकी यह है- की इसका इलाज या तो बिल्कुल मुफ्त में होता है या नाममात्र के पैसों में बड़े रोग का ट्रीटमेंट हो जाता हैं।

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2. प्राकृतिक चिकित्सा पद्ति [ Naturopathy ]

इसको अंग्रेजी में नेचुरोपैथी कहते हैं। इसके सेंटर भारत के कुछ ही शहरों में खुले है। कही पर उपचार महंगा है तो कही पर सस्ता।  मैं आपको आगरा जिले के आँवलखेड़ा गांव में प्राकृतिक चिकित्सा करने की सलाह दूंगा, यहाँ पर दो हजार में उपचार हो जायेगा साथ ही रहने खाने की सुविधा अखिल विश्व गायत्री परिवार की ‘गायत्री शक्तिपीठ’  में हो जायेगी। शक्तिपीठ आँवलखेड़ा गाँव में ही बनी हुई हैं। नेचुरोपैथी के अंदर आपको सूर्य स्नान, मिट्ठी-स्नान,  शरीर के अंग गुदा में  एनिमा लगाया जाता हैं। वह सात दिन सिर्फ आपको फल (fruits) खिलाया जाता हैं।

3. योग चिकित्सा पद्धति [ Yoga Healing ]

योग को इंग्लिश में योगा थैरेपी भी बोलते हैं।
योग चिकित्सा  के अंदर आसन, प्राणायाम, वह व्यायाम आते हैं। इसको आप इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे ही निशुल्क सीख सकते हैं।  

4. ध्यान [Meditation Therapy ]

इसे अंग्रेजी में मेडिटेशन थैरेपी भी कहते हैं। ध्यान का मतलब होता है, बाहर की सारी आवाजो को छोड़कर अंदर की साँसों की आवाज को सुनना। अपनी आती-जाती सांस को महसूस करना और ऐसा लगभग 10 से 30 मिनट प्रतिदिन करना इससे आपके मन के अंदर चल रही चटर-पटर, फालतू की बकबक बंद हो जायेगी और आपको एक अलग ही सूकून मिलेंगा।

5.  पेड़ पौधों से प्राप्त भोजन चिकित्सा [ Plants Based Food ]

इसे अंग्रेजी में ‘प्लांट बेस्ड फ़ूड’ कहते हैं। मतलब ऐसा भोजन जो नेचर ने बनाया है, इसमें किसी प्रकार की मिलावट नही है। ताजा-ताजा सीधे खेतो-बागानों से आया हो। इसमें दो कुछ प्राकृतिक चीजे आती हैं, जिसको आप डाइट बनाकर अपनी सभी बीमारियों से मुक्ति पा सकते हैं।
A. फलाहार ( All types Fruits )
B. कच्छी सब्जी (raw vegetable) :- जो आप कच्चा खा सकते हैं जैसे;-गाजर, टमाटर, खीरा, मटर आदि।
C. अंकुरित अनाज (sprouts) :- मूँग, मूंगफली, चने को मिलाकर बनाये जाने वाला एक शक्तिवर्धक आहार।
4. फलों का रस (fruits juice)
5. सूखा मेवा (Dry Fruits ) :- काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट, अंजीर आदि।
6. अन्य नेचुरल फ़ूड के नाम :- तिल, देशी गुड़, मूंगफली, मखाना, चना।

[विशेष] :-  कोई भी मनुष्य ऊपर दिए गए सभी चीजो को एक साल लगातार सुबह / शाम डाइट बनाकर खा ले ( और बाजार की और घर के भोजन) को छोड़ दे। तो उसके पूरे शरीर का कायाकल्प हो जायेगा। और एक साल नही कर सकते तो सिर्फ ” 7 दिन ” तक तो करके देखे, ऊपर बताई गई चीजो के अलावा आपको और कुछ नही खाना है। आपका बीपी, शूगर, टीबी, लकवा, आंखों की समस्या, नाक, कान, सबकुछ ठीक हो जायेगा। करके देखे फायदा हो या ना हो, नुकसान एक प्रतिशत नही होंगा। क्योकी उपर बताई गई सारी चीजें नेचुरल और स्वास्थ्य के लिए अति लाभकारी है।

6. सात्विक आहार [ Satvik Food Therapy ]

सात्विक आहार को आस्वाद भोजन भी कहते है। इसमें आपको लहसून, प्याज, मिर्च, नमक, शक़्कर, और तेल, घी को बिल्कुल छोड़ना होंगा। बिल्कुल फीका आस्वाद भोजन करना होंगा। माँ भगवती भोजनालय हरिद्वार आश्रम में मैंने एक महीना लगातार आस्वाद भोजन किया है।

7. गोमूत्र – गौ चिकित्सा –

गौमाता मतलब गाय कहने में तो यह एक पशु है। पर हिन्दू धर्म में इसे माँ का दर्जा दिया गया है। लोग इसकी पूजा करते हैं। क्योकी गोमूत्र और गाय के पंचगव्य (दूध, दही, घी, छाछ व गोबर) से संसार की सभी बीमारियों का इलाज संभव है। अधिक जानकारी के लिए नींचे दी गई पोस्ट पर क्लिक करें;

जानिए गौमाता के गोमूत्र  के चमत्कारिक फ़ायदे 

अस्वस्थ पुरुष/महिला बनते हैं, देश पर बोझ  [बीमार पड़ना पाप है]

1. कोई भी व्यक्ति चाहे वो औरत हो या पुरूष अगर वह अनहेल्दी है तो सबसे पहले वह अपने परिवार पर बोझ बनते है उसके बाद समाज पर और उसके बाद देश पर क्योकी मेरे गुरु पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य  ने कहा था- ” स्वस्थ युवा : सबल राष्ट्र” बात सिर्फ नोजवानों लड़के लड़कियों तक सीमित नहीं है। हर व्यक्ति जो दिनभर मेहनत करके कमाता है, वह देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहा होता है। ऐसे मे अगर आप अस्वस्थ रहोंगे तो कैसे देश तरक्की करेंगा? यह एक विचारणीय प्रश्न है, जरूर सोचे हिम्मत मिलेंगी।

2. बीमार मनुष्य हर समय निराशा में डूबा रहता है वो हर समय यही सोचता है, की भगवान जिस दिन मेरी ये सभी बीमारियों को ठीक कर देंगा उस दिन मैं कुछ भी कर सकता हूँ। मैं अपना मनपसंद केरियर बना सकता हूँ। मैं कुछ भी कर सकता हूँ। और ये दिन बहुत कष्टदायक होते हैं, क्योकी मैंने भी ऐसे दिन बहुत साल तक देखे हैं।

3. जिस व्यक्ति के चार-पाँच बीमारियां साथ हो जाती हैं। वह फिर नशे की लत में पड़ जाता है, उस बीमारी के दुःख और दर्द को छिपाने के लिए। और ऐसे में उसकी पूरी जिंदगी खराब हो जाती हैं।

4. आपके पास चाहे लाखो की संपत्ति हो या करोड़ो/अरबो रुपये की अगर आप शरीर से सुखी नही हो, आपका कोई अंग खराब हो गया है, तो फिर दुनिया का सारा सुख फीका पड़ जाता हैं। उसका आनंद नही आता।

5. इसलिए कहा गया है, की भगवान ने सभी जीवों को आरोग्यता का वरदान देकर भेजा है। इसलिए ऊपर बताये नियमो, सूत्रों व चिकित्सा पद्धतियों का हर दिन अनुसरण कर उसका कट्टरता से पालन करें और हमेशा रोगमुक्त रहे।

जो कुछ मेरे मन में था, सबकुछ लिख दिया, अब आप इस अनमोल बहूमूल्य आर्टिकल पोस्ट को अपने सभी परिचितों, दोस्तो के साथ शेयर करें ताकी वो भी सुखी जीवन जी सके। अंत बस एक लाइन के साथ पोस्ट को खत्म करूंगा- ” आरोग्य (सम्पूर्ण स्वस्थ जीवन) हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है” !

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