भारतीय संस्कृति में गाय का महत्व | गाय को गौ माता क्यों कहते हैं?

भारतीय संस्कृति में गाय का महत्व | गाय को गौ माता क्यों कहते हैं?

आपने बहुत सारी पोस्ट देखी होंगी, जिसमें आर्टिकल का शीषर्क दिया हुआ हैं। ‘ गाय पर निम्बध’ और पोस्ट में फोटो लगा हुआ हैं, विदेशी गाय या जर्सी गाय का। और लोग उसमें फायदा भी लिख देते हैं। इससे होता क्या है, जो अनपढ़ होते हैं, वे लोग जर्सी गाय का पालन करके लाभ की जगह अपने परिवार व बच्चों का नुकसान कर देते हैं। लेकिन आज मैं, इस पोस्ट में सिर्फ भारतीय गाय के बारे में बताऊंगा। अगर आप यह पोस्ट निम्बध की दृष्टि से पढ़ रहे हैं, तब भी इसमें आपको सम्पूर्ण जानकारी मिल जाएगी। ओर अगर एक देशभक्त इंसान या गोभक्त की दृष्टि से पढ़ रहे तो भी आपको सम्पूर्ण ज्ञान इसमें मिल जायेगा। और मैं, सभी लोगो से निवेदन करता हूँ, अगर आपने यह पूरी पोस्ट पढ़ ली, तो गाय क्या है, गाय का महत्च, गाय के संदर्भ में सम्पूर्ण जानकारी समझ लेंगे।

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भारतीय गाय का महत्व

गाय को भगवान का दर्जा आप दे सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने गौपालन किया। हमारे महान ऋषि मुनियों ने गाय का पालन किया। जब ये महान लोग जिनकी बदौलत यह देश चल रहा हैं। वो इस गोमाता को इतना महत्व देते थे, तो हम तो मनुष्य हैं। इस बात को आप लिख दो, अगर आप गोभक्त हो। ” गाय बचेंगी, तभी भारत बचेंगा। भारत की जान व प्राण हैं- गाय।” भारतीय गाय हम सब के लिए एक वरदान है। गाय को शास्त्रों में कामधेनु भी कहा जाता है।

 

गाय पालने के 20 फायदे ( importance and benefits of indian cow in Hindi )

1. भारतीय गाय का पंचगव्य ( दूध, दही, घी, छाछ, मक्खन) अमृत हैं। बहुत ज्यादा पोष्टिकता, आरोग्यता प्रदान करने वाला होता हैं। लगभग 10 से 100 प्रकार की बीमारियों का इलाज सिर्फ प्रतिदिन पंचगव्य खाने से हो जाता हैं।

2. भारतीय गाय का अवतरण हमारे कल्याण के लिए हुआ है।

3. भारतीय गाय (गोमाता) में अंहिसा , करुणा, ममत्व, वात्सल्य आदि दिव्य गुण होते हैं। सिर्फ गाय को सहलाने से और उसकी आँखों में देखने से तनाव चिंता, डिप्रेशन खत्म हो जाता हैं.

4. भारतीय गाय से ही देवो में देवत्व तथा मानवों में मानवता का निर्माण होता हैं।

5. गोमाता अपनी कृपा शक्ति से पृथ्वी को संतुलित तथा पर्यावरण को शुद्ध रखती हैं।

6. भारतीय गाय के स्नेह से मनुष्य को स्वस्थ शरीर , पवित्र हृदय तथा विवेकयुक्त मष्तिष्क मिलता हैं।

7. गाय की सेवा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों पुरुषार्थ सिद्ध होते हैं।

8. गाय की रक्षा से मनुष्य, देवता, भूत-प्रेत, यक्ष-राक्षस, पशु-पक्षी, वृक्ष-घास आदी सबकी रक्षा होती हैं।

9. जो पुरूष/महिला गायों की सेवा करता है। उस पर संतुष्ट होकर गौऍ (गाय) उसे अत्यंत दुर्लभ वर प्रदान करती है।

10. गाय को भय (डर) से मुक्त कर देने पर मनुष्य खुद भी भयो से मुक्त हो जाता हैं।

11. कमजोर, अपंग गौमाता को औषधि प्रदान करने से मनुष्य स्वंयम भी सभी रोगों से मुक्त हो जाता हैं।

12. कोई भी व्यक्ति एक गौशाला की भूमि दान करके या गौशाला बनाकर, अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त कर सकता हैं।

13. गोमूत्र में शरीर की सभी बीमारियों का इलाज हैं। यह एक सच्चाई है।

14. देशी भारतीय गाय के घी का दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता हैं।

15. देशी भारतीय गाय का दीपक जलाकर प्राणायाम करने से प्राण ऊर्जा 10 गुणा बढ़ जाती हैं।

16. देशी भारतीय गाय के गोबर से आप L.P.G गैस सिलेण्डर गोबर गैस के द्वारा कंप्रेशर से भर सकते हैं।

17. गोबर गैस से गैस वाली कार का सिलेंडर भी आप भर सकते हो। और गाड़ी दौडा सकते हो। जिस दिन यह प्लांट देश के हर गाँव-गाँव में लग जायेगा। भारत पेट्रोल व डीजल से मुक्त हो जायेगा।

18. गोबर खाद से कृषि का उत्पादन दो गुना बढ़ जाता हैं। बिजली भी बना सकते हो।

19. साधारण व्यक्ति या अनपढ़ नागरिक भी भारतीय नस्ल की एक गाय को अच्छी तरह से उसकी देखभाल करके, हर महीना 1,00000/- एक लाख रुपये कमा सकता हैं।

20. अंत में एक बड़ी बात बोलूंगा। गोमूत्र से हर बीमारी का इलाज संभव हैं। वह मानव, पर्यावरण, वह समस्त संसार के लिए गोमाता एक सुरक्षा कवच हैं।

 

भारतीय गाय की पहचान कैसे करें?

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   यहाँ हम, भारतीय गाय (गोमाता) और जर्सी, होलिस्टन, रेडिन (तीनो विदेशी गाय) के अंतर या उसकी पहचान करना सीखेंगे। ताकी आप किसी भी गाय को देखते ही, पहचान ले की, ये भारत की है या विदेशी।

1. भारतीय गाय ( गौमाता )

● सींग बड़े होते हैं।

● ककुद (पीठ उभरी हुई होती हैं। )

● भारतीय गाय दिखने में सुंदर व सुहावनी होती हैं

● रंभाना एकदम मधुर और स्पष्ट होती हैं।

● गलकंबल बड़ी होती हैं।

● जब भारतीय गाय के पास जाकर उसको हाथ लगाओगे, तो वो मारेंगी नही।

 

2. जर्सी/ होलिस्टन/रेडिन विदेशी नस्ल की गाय

● ये दिखने में डरावनी, साधारण या आधी सफेद और आधी काली होंगी।

● विदेशी नस्ल की गाय के सींग छोटे होते हैं।

● विदेशी गाय की पीठ सीधी होती हैं।

● गलकंबल छोटी होती हैं

● रंभाना अस्पष्ट होती है।

● जब आप जर्सी विदेशी गाय के पास जायेगे, तो वह डर जायेगी।

 

कोनसी गाय हमारे लिए बेहतर जर्सी या भारतीय गौमाता difference between indian cow and foreign cow

अभी तक हमने पहचान कर ली की, भारतीय गाय और विदेशी नस्ल की गाय को कैसे पहचाने। अभी हम भारतीय गोमाता व विदेशी नस्ल के दुधारू पशुओं में अंतर को समझेंगे। लाभ/हानि/फायदे।

1. भारतीय गाय (गौमाता)

● भारतीय गाय का दूध अमृत तुल्य व बी-2 श्रेणी का होता हैं।

● भारतीय गाय का गोमूत्र व गोबर औषधीय गुण युक्त होता हैं

● भारतीय गाय में भी बहुत सारी ऐसी नस्ल की गाय हैं, जो बहुत ज्यादा दूध देती हैं। जैसे ;-सुरभि गाय।

 

2. विदेशी नस्ल की गाय [जर्सी/होलिस्टन/रेडिन]

● विदेशी गाय का दूध पोष्टिक नही होता व बी-1 श्रेणी का होता हैं।

● विदेशी गाय का गोमूत्र व गोबर में कोई भी औषधीय गुण नही होता हैं

● विदेशी नस्ल की गाय बहुत अधिक दूध देती हैं। लेकिन रुकिए! उस दूध का भी आप क्या करोंगे? जो आप अपने परिवार और बच्चों को नही पिला सकते ना ही किसी अन्य ग्राहकों कोस्वदेशी के प्रणेता व महान समाज सुधारक राजीव दीक्षित जी ने जर्सी गाय के दूध को जहर बताया हैं

निष्कर्ष;- भारतीय नस्ल की गाय ही हमारे हिंदुस्तान और हिंदुस्तान की जनता के लिए फायदेमंद है। क्या गाय में सचमुच में 32 करोड़ देवी-देवता हैं?

बत्तीस करोड़ तो नही परन्तु जितने भी हमारे हिन्दू धर्म के देवी-देवता हैं, वह सब गोमाता में विराजमान हैं। इसका लाइव उदरण के द्वारा मैं आपको समझाता हूँ;-
” गाय के कंठ में महादेव जी विराजमान हे, भारतीय गाय कुछ भी मान लो गलत चीज खा ले, तो वह कचरा या गलत चीज उसके दूध और गोमूत्र में नही मिलती (मतलब दूध और गोमूत्र में उस गलत खाद्य प्रदार्थ का कोई असर नहीं होता)!! देखा, कितनी अद्भुत चीज हैं। और ये बात खुद राजीव दिक्सित जी ने रिसर्च करके बताई। इसलिए आज मैं, आपसे हाथ जोड़कर प्राथर्ना करता हूँ। की आप किसी भी कारणवश गाय को लकड़ी से / पैर से ना मारे उनको चोट ना पहुँचाये। वरना आप पाप के भागीदार बनेंगे।

भारतीय गाय को कत्लखानों में जाने से कैसे बचा सकते हैं? [Gou mata ko katne se kaise bachaye]

अगर आप को गाय को कत्लखानों में जाने से बचाना हैं, कसाइयो के हाथों से कटने से बचाना हैं। तो कुछ चीजो को आज से ही छोड़ने का प्रण लेना पड़ेंगा। मैं यह जो भी चीजे नीचे बता रहा हूँ। यह सब गाय के मांस, चमड़ी, खून और हड्डियों से बनती हैं।
1. चाय ( जो आप प्रतिदिन पीते हो) चाय की जगह आप  आयुर्वेदिक हर्बल चाय पीये। 

 

2. सभी प्रकार की चॉकलेट, कैडबरी, डेयरी मिल्क, टॉफी इत्यादि खाना आज ही छोड़ दें।

 

3. साबूदाना, लिपस्टिक, नेल पॉलिश, का उपयोग करना बंद कर दे।

 

4. सभी प्रकार की चमड़े की वस्तुए जैसे ;- बटवा (पर्स), पहनने का बेल्ट, जैकेट, हैंड बैग) इत्यादि।

 

5. टूथपेस्ट ( कोलगेट व सभी टूथपेस्ट जिसमे से झाग निकलता है)

 

6. अगर कुछ ज्यादा पैसा देना पड़े तो कोई बात
नही (दूध, घी, दही इत्यादि) गाय का ही खरीदे।

 

8. अगर संभव हो तो अपने घर, फैक्ट्री, फार्म हाउस या खेत में गाय रखे या फिर किसी गोशाल में गाय गोद लेकर, उसके रखरखाव की जिम्मेदारी ले।

 

9. गोवंश की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी जन आंदोलनों को सफल बनाने में तन, मन, धन से सहयोग देवे।

 

10. सेहतमंद रहने के लिए गोबर-गोमूत्र से उत्पादित जैविक अनाज फल व सब्जियों का ही उपयोग करें।

 

11. घायल, बीमार एंव असहाय गोवंश की सेवा करे। वरना ये कसाइयो के हाथों में सौप दी जायेगी।

 

12. शास्त्रो के अनुसार अपनी कमाई व व्यवसाय के लाभ का 10 प्रतिशत हिस्सा गोसेवा में लगाये।

 

13. गोरक्षा के उपाय – कत्लखाने जाते हुए गोवंश की रक्षा हेतु पुलिस व गोसेवकों को जानकारी देवे।

 

14. गोरक्षा के उपाय – घायल गोवंश को बचाने के लिए गो एम्बुलेंस को फोन कर पशु चिकित्सालय पहुँचाये।

 

15. प्लास्टिक की थैली में डाली गई भोजन सामग्री, फल व सब्जियों के छिलके, थैली सहित खाने से गोवंश मरता है। अतः प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग ना करें।

 

16. अपने ऑफिस, घर, दुकान, फैक्टरी व कार्यालय पर गोग्रास गुल्लक रखें।

 

17. प्रतिदिन एक घंटा गोसेवा में लगाये। लोगो को गाय रखने के फायदे के बारे में बताये।

 

18. सभी प्रकार के सौंदर्य प्रसाधन छोड़ दो। (कॉस्मेटिक आइटम)

 

◆ कुछ संकल्प ले आज ही;-◆

●पहली रोटी गाय को देवे, जितनी आपकी क्षमता हैं, उतनी दे।

● पंचगव्य व गो उत्पाद जमकर खरीदे व अपने आसपास के लोगो को भी गाय के गोबर से बने साबुन, धूपबती का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। और भी 20 से ज्यादा उत्पाद गाय के गोबर व गोमूत्र से बनते हैं।

भारत की सबसे बडी गौशाला कहा पर हैं?

अब बात करते हैं, Bharat ki sabse badi ghoshala के बारे में। श्री पथमेड़ा गोधाम महातीर्थ आनंदवन तहसील रेवदर, जिला – (सिरोही) राजस्थान में हैं। जिसकी स्थापना परम् पूज्य जगदधिष्ठात्री मनोरमा गोमाता के द्वारा की गई। यह वो भूमि हैं, जिसे भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र से द्वारिका जाते समय श्रावण, भादो महीने में रूककर वृदावन से लायी हुई सर्वाधिक दुधारू, साहसी गायों के चरने व विचरने के लिए चुना गया था। गत 12 शताब्दियों से कामधेनु, कपिला, सुरभि की संतान गोवंश पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए सन 1993 में राष्ट्रव्यापी रचनात्मक गोसेवा महाभियान का प्रारंभ इसी Pathmeda गोधाम स्थान से हुआ। आपको जानकारी के लिए बता दूं, की इसी गोशाला के महाराज व गाँव वालों ने कसाइयो के हाथों लाखो गोमाता को बचाया और यहाँ पथमेड़ा में उनका सरंक्षण किया।

◆ Pathmeda Goudham Gaushala की विशेषता◆
१. गोसरंक्षण
२. गोपालन
३. गोसंवर्धन
४ पंचगव्य संकलन, परिष्करण एंव विनियोग
५. संत्सग, सत्संस्कार, स्वास्थ्य और स्वालंबन

 

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