राजीव दीक्षित जी का जीवन परिचय | Rajiv dixit biography in Hindi

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राजीव दीक्षित जी का जीवन परिचय – rajiv dixit biography in hindi 

राजीव दीक्षित जी का देश के लिए योगदान यह है की उन्होंने करोड़ो भारतीय लोगो को अपने पैरो पर खड़ा किया। देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही बहुत सारी विदेशी कंपनियों को देश से भागने पर मजबूर किया। आयुर्वेद और योग को पूरे भारत में फैलाया।

जन्म तिथि (Date of birth)30 नवम्बर 1967
म्रत्यु के समय उम्र (Death Age)43 years (1967–2010)
शिक्षा (education qualification)M. Tech. from IIT kanpur
नागरिकता (Nationality)भारतीय
पिता का नाम (Father)
राधे श्याम दीक्षित
माता का नाम (Mother)मिथिलेश कुमारी
जन्म स्थान (Birth Place)
Village नाह, अलीगढ़, उत्तरप्रदेश।
धर्म (Religion)हिंदू (Hinduism)
Food HabitVegetarian शाकाहारी
WifeUnmarried
भाषा ज्ञान (language)
हिंदी, English, Sanskrit, Marathi.
Brother Nameप्रदीप दिक्सित

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लघु जीवन परिचय (biodata short bio)

एक ऐसा क्रांतिकारी आदमी, जो आज हमारे साथ नही हैं, परन्तु आज भी उनके दिए हुये ज्ञान से करोड़ो भारतीय लोग अपना जीवन सफल बना रहे हैं। लाखो भारतीयों की जटिल से जटील बीमारियों को बिना एक रुपया खर्च किये दूर हो रही है। इनके शरीर के दुखो को दूर कर रहे हैं। राजीव दीक्षित जी ज्ञान के महासागर थे, इनकी गिनती भारत देश के महान लोगो की श्रेणी में की जाती हैं। देश के सभी लोग उन्हें अपना आदर्श पुरूष मानते हैं। क्योंकि उन्होंने जो देश के लिए अपना पूरा जीवन लगाया, वो बहुत बड़ी बात हैं। उन्होंने भारत के युवाओं और भारत के सभी वर्ग के लोगो जो बिजनेस आईडिया बताये, उनसे पैसा भी बहुत आयेगा, देश की गाय भी सुरक्षित रहेंगी और अर्थव्यवस्था भी भी बढ़ेंगी।

 

स्वदेशी के कट्टर समर्थक

आजाद भारत में गांधीजी के बाद सबसे ज्यादा स्वदेशी का समर्थन राजीव दिक्सित जी ने किया। स्वदेशी शब्द उनके मूल में था। उन्होंने जीवन पर हर वस्तु देश में बनी और देश के लोगो द्वारा बनाई गई, उसी का इस्तेमाल किया। उन्होंने जीवनभर खादी वस्त्र पहले ( कुर्ता-पायजामा ) जीवनभर सात्विक शाकाहारी भोजन खाया। इसके अलावा उन्होंने जीवनभर अंग्रेजी चिकित्सा की ज़हरीली दवाइयों को हाथ तक नही लगाया। राजीव जी कहते है,  एलोपैथी चिकित्सा कहती हैं, पहले तुम बीमार पड़ो फिर हम तुम्हें ठीक करेंगे। और हमारा आयुर्वेद कहता है, बीमार ही मत पड़ो। यह ताकत हैं, हमारे आयुर्वेद की। राजीव दीक्षित जी और देश की महिला वैज्ञानिक दोनों ने मिलकर 50 से ज्यादा विदेशी कंपनीयो पर कोर्ट में केस कीया और जीत भी मिली। राजीव दीक्षित जी के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा अगर कोई कंपनी पैसा लूट कर विदेश लेकर जा रही हैं। उसमें आईटीसी और हिन्दुस्तान यूनीलीवर शामिल हैं। यह दोनो कंपनी विदेशी हैं। यह कंपनीया जिस देश में व्यापार करने जाती है उस देश का नाम अपनी कंपनी के आगे जोड़ देती हैं, जिससे लोगो को लगे की हमारे देश की कंपनी हैं। और जो पाठक यह मेरा ब्लोग पढ़ रहे हैं, वो भी पांच साल पहले इन कंपनियों को स्वदेशी ही मानते थे,क्यों सही बोला मैने? वो तो राजीव दीक्षित ने इन सभी विदेशी कंपनीयो की पोल खोली, तब पता चला। उन्होंने देश के क्रिकेटर, एक्टर और सेलेब्रिटीज़ को जमकर लताड़ा, क्योंकि इन लोगो ने पैसो के लिए बहुत सारी नशे वाली चीजो का विज्ञापन किया। इससे हिंदुस्तान के नोजवानो के अवचेतन मन में वे सारे दृश्य समा गए और करोड़ो लोगो का इससे जीवन बर्बाद हो गया। उसके बाद  भारत में रासायनिक दवाईया जो खेतो में छिड़काव के लिए उपयोग में आती है, यह सब जहरीली दवाईया विदेशी कंपनीया बनाती हैं। कसम खाओ, विदेशी उत्पाद कभी नही ख़रीदोंगे।

भारत दुनिया का सबसे अमीर देश था 

राजीव दीक्षित जी के अनुसार आज से 200 साल पहले 18 वी शताब्दी का भारत  दुनिया का सबसे धनवान देश था। व्यापारिक- दृष्टि से भारत  दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश था। भारत के बुनकरों के हाथ से बने कपड़ो की गजब मांग थी, भारत का स्टील दुनिया का सबसे बेहतरीन गुणवत्ता का स्टील हैं। आपको जानकार हैरानी होंगी की सर्जरी में उपयोग आने वाले सारे औजार भारत के स्टील से ही बनते हैं। भारत उस समय व्यापारियों का देश था। इसके आलावा उस समय देश में कोई गरीब नही था। दो सो साल पहले के भारत में सिर्फ 20 करोड़ जनसंख्या थी। उस समय भारत के हर गाँव में एक गुरूकुल होता था, और गुरूकुल से विद्या लेने वाला बच्चा देशभक्त बनता था। वो अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ समाज का भी भला सोचता था। एक इतिहासकार अपनी किताब में भारत के बारे में लिखता हैं, की उस समय हर भारतीय के घरों में इतने सोने के सिक्के होते थे, उनको गिनने में भी आलस आता था। वो हर चीज सोने के बदले में खरीदते थे। मतलब आप सोच सकते हो, दुनिया का सबसे ज्यादा सोना भारत देश के पास ही था। इसके अलावा दोस्तो अपना प्यारा सुंदर देश उस समय दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश था। सारी दुनिया ने सर्जरी भारत से सिखी है। इसके जनक हमारे ऋषि सुश्रुत हैं। ये तो अंग्रेज और ईस्ट- इंडिया कंपनी के कारण भारत को गुलाम बनाकर पुरा जड़ से खोखला कर दिया।

भारत स्वाभिमान ट्रस्ट और आजादी बचाओ आंदोलन की कमान राजीव दीक्षित जी के हाथ में

आजादी बचाओ आंदोलन के कार्यालय में राजीव भाई अपनी विश्वविद्यालय की पढ़ाई करके आते थे, और जो भी पत्र उनके शुभ-चिंतक उन्हें भेजते थे। जब तक उन पत्रों का जवाब वो लिखकर अपने पड़ोस के डाकघर में डाल नही देते थे। तब तक घर पर नही जाते थे।योग गुरु स्वामी रामदेव ने उनके ज्ञान,प्रतिभा और उनकी लोकप्रियता को देखते हुये उन्हें भारत स्वाभिमान का राष्ट्रीय सचिव बनाया। उन्होंने अपने भारत भ्रमण के दौरान देश के अलग-अलग राज्यो, जिलों और गांवों में जाकर अपने व्याख्यान दिये। इस भारत भ्रमण के दौरान उन्होंने बहुत कुछ देखा, राजीव जी भारत के एक गांव में व्याख्यान देने गये थे, जहाँ पर कोई उनको सुनने नही आया, सिर्फ टैंट वाला वहाँ पर था, जब उन्होंने इसकी वजह पूछी, गाँव का कोई भी आदमी इस कार्यक्रम में क्यो नही आया? तब उस टैंट वालेआदमी ने बोला इस गांव में इतनी गरीबी हैं, की लोगो के पास पहनने के लिए कपड़े नही हैं। इस घटना ने राजीव भाई अंदर से झकझोर दिया। इस भारत यात्रा उनका उदेश्य साफ था। लोग स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करे, विदेशी कंपनीयो का बहिष्कार करे। और शरीर को बर्बाद करने वाली अंग्रेजी गोलियां ना खाकर योग और आयुर्वेद को अपने जीवन में उतारे।

राजीव जी का देश प्रेम

राजीव दीक्षित अपने भाषण में कहते थे- देश के सभी राजनेताओं, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और प्रशासको
को देश की सेवा फोकट में करनी होंगी, वरना जाओ अपने घर। क्योंकी इन सब सरकारी अधिकारीयो को हर दिन लाखो, करोड़ो रुपये खर्च करने की छूट मिलती हैं। और जिन आम आदमी- गरीब लोगो ने इनको पद पर बिठाया उनको प्रतिदिन 20 रुपये भी नही मिलते हैं। जो व्यक्ति आध्यात्मिक ज्ञान ले लेता है, वह अपना जीवन एक लड़की पर नही पूरे मानवता के लिए लगाता हैं। यही बात  राजीव दीक्षित  जी के साथ भी हुई। उनकी माताजी घर में हर रोज रामायण का पाठ करती थी। इससे राजीव भाई की रूचि भक्ति की और बढ़ने लगी। बाल्याकाल में उन्होंने श्रीमद भगदगीता और रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ पढ़ लिये थे। इससे उनका आध्यात्मिक-विकास तो बचपन में ही हो गया था।  उसके बाद उन्हीने आयुर्वेद पर अध्ययन शुरू किया, तब उन्होंने ऋषि वाग्भट्ट जी से जीवन जीने का मूल मंत्र सीखा। “जो व्यक्ति अपने दुखों को दूर करके, दूसरे लोगो के दुख दूर करने में अपनी जिंदगी लगाता हैं, भले वो सफल न हो, लेकिन अगर वो पुरी ईमानदारी से मेहनत करता हैं। उसको मोक्ष मिलता हैं। इसी बात ने उनको अंदर से हिला दिया। और इसी तरह राजीव जी करोड़ो भारतीयों भारतीयों के दुखो को दूर किया। उसमें एक मैं भी शामिल हूँ। इस तरह आप समझ सकते हो, इनकी सफलता में  आध्यात्मिक ज्ञान का बहुत बड़ा योगदान रहा।

राजीव दीक्षित जी के बारे में 10 रौचक तथ्य

1. जितना कीमती और उपयोगी ज्ञान इंसान दस जन्म लेकर भी प्राप्त नही कर सकता, उतना ज्ञान राजीव भाई ने 20 साल में प्राप्त किया।

2. ऋषि वाग्भट्ट जी की दोनों पुस्तकों का हिंदी में भाष्य करके उसमे से जो आज के लोगो के काम के नियम हैं, उनको अलग लिखा।

3. राजीव दीक्षित जी गणना देश के महान लोगो में होती हैं।

4. अगर राजीव दीक्षित जी देश के प्रधानमंत्री होते, तो वह सारी चीजे जो प्राचीन भारत में हमे देखने को मिलती थी। वह आज आप वर्तमान भारत में देखते।

5. अगर राजीव दीक्षित जी आज जिंदा होते तो देश के हर गाँव- शहर में ऋषि-मुनियों, शहीदों और क्रांतिकारी लोगो के स्टैचू लगे होते हैं।

6. उनका नारा था, मै भारत को भारतीय मान्यता के आधार पर खड़ा करना चाहता हूँ। और इस मिशन में लगा हुआ हूं।

7. उन्हें भारतीय होने पर गर्व था, क्योंकि जिस भी दूसरे देश के साथ उनकी चर्चा या बहस हुई उस में भारत की ही विजय हुई।

8. राजीव जी कहते थे, अगर देश का हर नागरिक एक उत्पाद या चीज की स्वदेशी कंपनी खोले तो, सारी बेरोजगारी खत्म जायेंगी।

9. राजीव दीक्षित जी को कोई भी मीडिया वाले अपने टीवी चैनल पर नही बुलाते थे, क्योंकि उनको पता हैं, अगर राजीव जी आये तो सारी विदेशी कंपनीयो की कालाबजारी का पर्दाफाश कर देंगे, और वो कंपनीया हमारे टीवी चैनल पर विज्ञापन नही देंगी। हा, एक बार संस्कार चैनल पर आये थे, उसमें उन्होंने स्वर्णिम भारत के इतिहास के बारे 40 मिनट लगातार भाषण देकर करोड़ो लोगो का दिल जीत लिया था।

10. आज भी राजीव दीक्षित का भवन पंतजलि योगपीठ हरिद्वार में बना हुआ हैं। वहाँ से भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का कामकाज चलता है।

 

कड़वे वचन जो आपका पूरा जीवन बदल कर रख देंगे (rajiv dixit speech in hindi)

● टीवीएस ग्रुप का मालिक व धीरूभाई अंबानी मिट्टी के बर्तन में खाना खा सकते हैं, तो आप क्यों नही?

● गाय बचेंगी, तभी भारत बचेंगा। भारत की जान व प्राण है- गाय। गोमाता को कत्लखानों में जाने से बचाये।

● जिस दिन गोबर-गैस का प्लांट देश के हर गाँव-गाँव में लग जायेंगा। भारत पेट्रोल और डीजल से मुक्त हो जायेंगा। भारत को फिर विदेशो से तेल आयात करने की जरूरत नही पड़ेंगी।

● एक आदमी अपनी ‘ मातृभाषा से ही मौलिक चिंतन कर सकता हैं, वह महान आदमी बन सकता है। उन्होंने भारत के वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी उदाहरण दिया;- कलाम जी ने जीवन भर अपनी मातृ-भाषा तमिल में ही अध्ययन किया, वो तो जब राष्ट्रपति बने तब उनको अंग्रेजी की जरूरत पड़ी और अंग्रेजी सीखी।

● अंग्रेजी एक गरीब भाषा हैं। उसके पास मूल शब्द 2400 ही हैं। बाकी सारे शब्द दुनिया की भाषाओ से उधार लिये हुए हैं। और कुल मिलाकर 12000 शब्द हैं। इसके विपरीत हमारी संस्कृत भाषा में 1.5 लाख शब्द है। वह मराठी और गुजराती में 48 हजार शब्द है।

● प्रजातंत्र भगवान राम ने ही बनाया, इससे पहले देश में कोई प्रजातंत्र नही था।

● जो लोग देश को बाँटने वाली और देश को बर्बाद करने वाली राजनैतिक पार्टियों का समर्थन करते है, वे सब लोग देशद्रोही और गद्दार हैं।

● राजीव जी के अनुसार हमारे देश के भगवान राम और कृष्ण के अवतार वह सारी पौराणिक कथा सत्य है।
जैसे;- नल और नील द्वारा 5 लाख 113 वर्ष पहले बनाया गया समुद्र अभी भी हैं। और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने भी कहा अद्भभुत, भारत की महानता इन उदाहरण से आप समझ सकते हो।

● राजनीति पैसा कमाने के लिए हैं, यह देश की बिना पैसा लिए करनें वाली सेवा हैं।

बाबा रामदेव जी और राजीव दीक्षित जी का रिश्ता (baba ramdev and rajiv dixit friendship story)

यह बात खुद अपने मुख से राजीव दीक्षित जी ने अपने वीडियो में बोली हैं। हरिद्वार के कनखल आश्रम में पहली बार उनकी स्वामी रामदेव जी से मुलाकात हुई। तब उन्होंने रामदेव जी के जीवन लक्ष्य को सुना, तो उनका जवाब था, स्वामी जी आपका औऱ मेरा मिशन एक हैं। क्यों न हम दोनों साथ मिलकर इस मिशन को आगे बढ़ाये। बस यही से इन दोनों महान लोगो की जीवन-यात्रा शुरू होती हैं। रामदेव जी गाँव-गाँव जाकर योग सिखाते थे, तो राजीव जी गाँव-गाँव जाकर लोगो आयुर्वेद के प्रभावशाली नियमो के बारे में जानकारी देते थे। इसके अलावा वो अपने हर भाषण में स्वदेशी की बात जरूर करते थे। वो कहते की, देश का किसान सबसे बड़ा आदमी हैं, उन्होंने कुमार को वैज्ञानिक बताया। वो अपने एक व्याख्यान में कहते हैं, की इस अभियान के तहत हम देश के 15 लाख लोग ऐसे तैयार करेंगे वो इस देश को फिर से खड़ा करेंगे।

अंग्रेजों के कानूनों का गुलाम आजाद भारत (rajiv dixit speech on indian independence)

राजीव भाई कहते हैं-  देश का दुर्भाग्य यह हैं, की आजादी के बाद भी सारे कानून अंग्रेजो द्वारा बनाये हुए चल रहे हैं।
मतलब “99 वर्ष” के समझौते में भारत सरकार फँसी हुई हैं। और इस समझौते का नाम हैं। ” इंडिया एज ऑन लीज फ़ॉर निन्यानवें साल ” इसका मतलब यह हैं, की अंग्रेज 99 वर्ष बाद भारत पर वापस कब्जा कर सकती हैं। और अपना शासन चला सकती हैं। जिसके पेपर और दस्तावेज आज भी लंदन में पड़े हैं। राजीव दीक्षित कहते हैं- अंग्रेजों में और रावण में कोई अंतर नही हैं। अंग्रेजों द्वारा बनाये गये 7, 135 सात हजार एक सौ पैतीस कानून राज्य स्तर पर केंद्र स्तर पर बनाये गये थे। जो आजादी के 70 साल बाद भी नही बदले, इसलिए देश की बहुत सारी समस्याओं का समाधान नही निकल रहा हैं।

राजीव दीक्षित जी की मृत्यु कैसे हुई?(Rajiv Dixit Death Biography In Hindi)

राजीव दीक्षित जी की मृत्यु 10 नवम्बर 2010 (43 वर्ष आयु) छतीसगढ़ के भिलाई नामक जगह पर हुई।
कुछ लोग उनकी मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताते है। पर मै आपको बताना चाहता हूँ, यह सिर्फ एक झूठ है। जो आदमी आयुर्वेद का इतना कट्टर समर्थक हैं, जो आदमी पिछले 20 साल से हॉस्पिटल नही गया, जो आदमी हर दिन लाखो लोगो को जड़ी-बूटियों और ऋषि वाग्भट्ट जी के नियमो से उनका उपचार करता था। उस आदमी को दिल का दोरा [ हार्ट – अटेक ]  कैसे हो सकता हैं।

5 कारण मौत के (Rajiv dixit death reason in hindi)

अभी मैं आपको सम्पूर्ण अनुसंधान के बाद पांच ऐसे कारण बता रहा हूँ जिससे यह साबित होता हैं, की राजीव दीक्षित जी की मौत नही हुई उन्हें एक बड़ी साजिश के तहत मारा गया। 

1).राजीव दीक्षित जी की मृत्यु को उनके चाहने वाले रहस्यमयी मौत इसलिए कहते हैं। क्योंकी उनकी बॉडी का पोस्टमार्टम नही करने दिया गया।

2).  जब उनके शरीर को हॉस्पिटल से बाहर लाया गया तो, तेज रोशनी उनके चेहरे पर डाली गई, ताकि उनका चेहरा नीला ना दिखे। उनकी मौत के बाद उनका चेहरा पूरा नीला और काला पड़ गया था, जैसे मानो उनको किसी ने कुछ जहरीला पर्दाथ किसी चीज में मिलाकर खिलाया हो ।

3.) देश की सारी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निशाने पर राजीव जी थे, हो सकता है, इन कंपनियों ने राजीव भाई को मरवाया हो? क्योंकि उनका मानना था, की हमारी स्वदेशी सेना की सरकार बनी तो सारी विदेशी कंपनिया देश से बाहर जायेंगी। कहते हैं- राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों की वजह से कोका-कोला और पैप्सी की बिक्री कम हो गई थी। उनके अनुसार यह सारे कोल्डड्रिंक्स शरीर के लिए हानिकारक हैं।

Rajiv Dixit Documentary Movie Video

FAQ सवाल जवाब

राजीव दीक्षित जी की कुल संपति कितनी थी?

Rajiv dixit net worth – शून्य! वे चाहते तो अरबो रूपये की संपत्ति बना सकते थे। लेकिन उनका जीवन का उद्देश्य कुछ अलग था। इसलिए वे बिजनेस के क्षेत्र में नही आये। उन्होंने लाखो भारतीयों को शानदार कम लागत में अधिक मुनाफे वाले बिजनेस आईडिया दिए।

Where is Rajiv dixit gurukul pali mahendergarh?

Address : राजीव दीक्षित गुरुकुल,  पाली जिला महेंद्रगढ़, राज्य – हरियाणा। (District Pali, Haryana) यूट्यूब पर इसका एक वीडियो है जिसके टाइटल में ही Contact Number दिये गए है उस पर कॉल करके जानकारी प्राप्त कर सकते है।

Rajiv dixit official app ⇓

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Rajiv Dixit Ji Official Website

कुछ ऐसी वेबसाइट आपको बता रहा हूँ जहाँ पर राजीव दीक्षित जी से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी Mp3, Video & Text Format में आपको मिलेंगी

  • https://www.rajivdxt.in/
  • https://www.rajivdixitmp3.com/

Rajiv dixit ji official youtube channel

#1. Swadeshi Chikitsa Nirmal
#2. Rajiv Patrika
#3. Ek Upper diye gaye Naam se hee hai.

Rajiv dixit death date

Ans – 30 नवम्बर 2010

 

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