आचार्य बालकृष्ण जी की जीवनी | Acharya Balkrishna Biography in Hindi

आचार्य बालकृष्ण जी की जीवनी | Acharya Balkrishna Biography in Hindi

 

इस पोस्ट में आप आचार्य बालकृष्ण जी के सम्पूर्ण जीवन परिचय को पढ़ेंगे।

जन्म तिथि-  4 अगस्त, 1972
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जन्म स्थान – हरिद्वार, भारत।
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देश के लिए योगदान :- विलुप्त होती हजारो दुर्लभ औषधियों और जड़ी – बूटियो को बचाया। उस पर अनुसंधान कर दुनिया भर में जड़ी-बूटियो से चिकित्सा का प्रचार किया।
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धर्म – हिंदू
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लोकप्रियता और उपाधि  –  आयुर्वेद मनीषी, वर्तमान ऋषि, आयुर्वेद आचार्य, स्वदेशी के समर्थक, पंतजलि सीईओ।
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भाषा ज्ञान – हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत,
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लक्ष्य – जड़ी- बूटियों से भारत ही नही पुरे विश्व को स्वस्थ रखना।

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पत्नी – अविवाहित. (शादी नही की)

 

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आचार्य बालकृष्ण जी का बचपन और शुरुआती जीवनी 

आज के धन्वंतरि, आयुर्वेद मनीषी बालकृष्ण जी का शुरुआती 25 साल का जीवन सफर बहुत दुःखो भरा था। वो गुरुकुल में रोटी बनाते थे। इसके अलावा वो हर काम जो भारत का समान्य से गरीब आदमी करता हैं, जैसे;- लकड़ी काटना, गोबर उठाना, पशुओं को खिलाने का चारा उठाना, आटा चक्की पीसना सभी काम किये। उनका जन्म भारत के एक नेपाली परिवार में हुआ था। काठमांडू से 200 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव हैं। उनके माता-पिता आज भी गांव में एक साधारण – सादा जीवन जीते हैं। वे उनके गाँव में ही खुशी से शांतिपूर्ण अपना जीवन बिता रहे हैं। स्वामी रामदेव जी से उनकी पहली बार मुलाकात हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के खानपुर गुरुकुल में हुई थी। गुरुकुल की शिक्षा खत्म होने के बाद आचार्य बालकृष्ण जी हिमालय पर जड़ी-बूटियों की तलाश में निकल गये। इसके अलावा उन्होंने हिमालय की गुफाओ में साधना भी की। बचपन में उन्होंने सिर्फ गुरुकुल में शिक्षा- दीक्षा ली, इसके बावजूद आचार्य जी के सामने आज दुनिया के बड़े- बड़े व्यकि, बिज़नेसमेन नतमस्तक होते हैं।  महर्षि चरक , सुश्रुत व धन्वतरि आदि के बाद ऋषि परम्परा के इतिहास का सबसे बड़ा ग्रंथ लिखने के लिए सम्पूर्ण विश्व आचार्य जी का ऋणी रहेंगा। आपको जानकार अच्छा लगेंगा, आज बालकृष्ण जी भारत के 8 वे सबसे अमीर आदमी हैं। यही नही आज उनका इंटरव्यू भारत के हर बड़े मीडिया ने लिया है जो इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा आचार्य जी को वर्ल्ड इकोनॉमिक फॉर्म, बिजनेस समिट में भी आमंत्रित किया गया जहाँ पर उन्होंने अपनी शानदार शुद्ध हिंदी भाषा में पूरे देश का दिल जीत लिया।

 

उपलब्धियां और सम्मान

1.) पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, पंतजलि रिसर्च फाउंडेशन, पतंजलि ग्रामोद्योग व दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट आदि संस्थाओं के आचार्य बालकृष्ण जी महाराज संस्थापक महामंत्री हैं। पंतजलि विश्वविद्यालय के बालकृष्ण जी कुलपति है। साथ ही आचार्य जी आचार्यकुलम (गुरुकुल) के मार्गदर्शक व निदेशक भी हैं।

2.) आयुर्वेद के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए हरियाणा व पंजाब के महामहिम राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी ने आचार्य जी को ” भारत गौरव ” अवॉर्ड से सम्मानित किया।

3.) पुणे शहर के संत श्री ज्ञानेश्वर गुरुकुल में महान इतिहास आचार्य स्वर्गीय डॉ श्रीपाद  कुलकर्णी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य जी को ” भीष्म”  पुरस्कार से  सम्मानित किया।

 

आचार्य बालकृष्ण जी से सीखें सफलता के गुर

● कार्य के अच्छे से न होने का कारण मन की चंचलता है, जिसे योगाभ्यास से दूर किया जा सकता है।

● काम करते समय यदि उससे मिलने वाले फल की इच्छा मन में बनी रहे, तो काम पूर्ण एकाग्रता के साथ नही हो पाता।

● एकाग्रता होने पर ही विषय को देखना, समझना, याद करना, व्यवहार में लाना और फिर सफलता पाना संभव हैं।

● तत्काल सही फैसले लेने के लिए तीव्र बुद्धि का होना अनिवार्य हैं, जबकि तेज बुद्धि के लिए अनिवार्य हैं – स्वाध्याय, ध्यान, समाधि।

● दूसरों को कष्ट दिए बिना यदि सचाई, ईमानदारी, निष्ठा और पूरी शक्ति से कार्य करते रहे, तो सफलता के रास्ते अपने आप बनते जाते हैं।

● छोटी और अस्थायी सफलता तो आदमी को अपनी कार्यदक्षता के कारण मिल सकती हैं, किंतु बड़ी और स्थायी
सफलता पाने के लिए श्रेष्ठ चरित्र और पूर्ण समर्पण भी साथ में होना जरूरी हैं।

● कम्पटीशन हमेशा खुद से हो, ताकि हमारा हर अगला कदम, हमारे पिछले कदम से बेहतर हो।

● हम खुद से बड़े नही बन जाते, बल्कि हमारे अच्छे कामों को देखकर समाज ही हमें बड़ा बनाता हैं।

● काम में जितना अधिक समय देंगे, उतनी ही अधिक सफलता पाएंगे, लेकिन टाइम नही देने में देर कर देंगे, तो हानि भी उठाएंगे।

● सफलता का कोई शॉर्टकट न पहले कभी था, न है और न आगे कभी होंगा।

● बड़ी-बड़ी डिग्रिया हासिल कर लेना, सफलता के शिखर पर पहुँचने के लिए अनिवार्य नही हैं।

● आदर्श व्यक्ति को सामने रखकर जब हम काम करते हैं, तब हमें एहसास होता हैं अभी और कितना तप, मेहनत और साधना करनी हैं

● जनता की माँग के अनुरूप निर्मित उत्पाद बाजार में छा जाता है, जैसे दंतक्रान्ति टूथपेस्ट। इसका पेस्ट या जैल वाला  रूप हैं। नयी पीढ़ी के लिए और उसमें जो जड़ी-बूटी हैं, वे पुरानी पीढ़ी के लिए हैं। (मेरी राय मान सकते हैं 10 % या 1% टूथपेस्ट में कुछ केमिकल हो, पर 90 प्रतिशत तो आयुर्वेदिक है, ना? बाकी सारी विदेशी/देशी कंपनियों के टूथपेस्ट को उठा कर देख लो शत प्रतिशत कैमिकल और जहरीली है। आपको जानकारी के लिए बता दू, पतंजलि ‘दिव्य दन्त मंजन भी आता है।

● आध्यात्मिक व्यक्ति का व्यापार, मात्र उसका व्यापार न होकर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनाने, रोजगार बढ़ाने, जनता के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने और धर्म व संस्कृति के सरंक्षण का एक माध्यम भी होता हैं।

बालकृष्ण जी महाराज (पतंजलि) के अनमोल कथन

1. हमारे बच्चों को कोमल दिल-दिमाग में बचपन से ही स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक एक भोगवादी विचार को बहुत ही चतुराई से डाला जाता हैं। की जीवन में सब टेस्ट एक बार जरूर लेकर देखने चाहिए, जबकि हमारे पुर्वज ऋषि-ऋषिकाओ, वीर-महापुरुषों का यह मानना हैं कि पाप, अनाचार, दुराचार, नशा, मांसाहार, अश्लील, अनैतिक एंव अधार्मिक कार्य को एक बार भी नही करना चाहिए। क्या हम साइनाइड का एक भी बार टेस्ट लेकर देखेंगे? क्या हम बिजली के करंट या आग में हाथ डालकर देखेंगे?

 

2. हम सब मिलकर चंद्रशेखर, राजगुरु, सुखदेव, भगतसिंह के सपनो का भारत, महात्मा गाँधी, लौह पुरुष सरदार वलभ भाई पटेल, स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद के सपनो का भारत बनाने  के लिए अपने-अपने लेवल पर अच्छे कर्म करेंगे वह अपने देश की सेवा करेंगे।

 

3. हम अपने जीवन में संकल्प लें कि आयुर्वेद विज्ञान का पालन करके व प्रतिदिन योग करके अपने आपको स्वस्थ रखेंगे और कभी आपातकालीन परिस्थिति में चिकित्सा (दवाई) की आवश्यकता पड़ी तो स्वदेशी से ही अपना उपचार करेंगें।

 

4. हमारे जीवन में आने वाली हर परेशानी में परमात्मा की शक्ति हमें मिलती रहती हैं। जब हम सच्चे मन से कर्म करते है, तो भगवान की शक्ति हमारे साथ रहती हैं, ऐसा मैने अब तक अनुभव किया।

 

5. जड़ी- बूटी की भव्यता को हम और अधिक भव्य बनाने का कार्य कर रहे हैं। यदि वनस्पतियाँ नही रहेंगी तो हमारा जीवन भी नही रहेंगा। औषधीय पौधे लगाकर हम स्वयं का ही उपकार कर रहे होते हैं। इसलिए अधिक औषधीय पौधो का रोपण करें, यही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ उपहार हैं।

6. जो विदेशी कंपनिया भारतीय औषधीय पौधों, मसालो और आयुर्वेद का माजक उड़ाती थी वही आज पंतजलि कंपनी की सफलता से और डर से अपने हर उत्पाद में कुछ न कुछ जड़ी बूटियां मिलाकर लोगो कोअपनी और आकर्षित कर रही है। पर अब जनता समझ चुकी हैं, क्या सही है और क्या गलत।

Also READ –  आचार्य बालकृष्ण जी के 30 आयुर्वेदिक नुस्खे 

 

वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया सम्पूर्ण जानकारी


आचार्य बालकृष्ण द्वारा रचित वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया मतलब ” विश्व भैषज संहिता ”  एक्सपर्ट इसे सभी चिकित्सा पद्तियो की प्रेरक पुस्तक व आयुर्वेद का वरदान मानते हैं। इसमें विश्व की सभी चिकित्सा पद्तियो में उपयोगी अनेक औषधिय पौधे लगभग (68 हजार) का प्रचलित नामो और गुणों सहित वर्णन हैं। इस वजह से यह आयुर्वेद के साथ-साथ अनेक अन्य चिकित्सा पद्तियो के लिए भी बेहद लाभदायक मानी जा रही हैं। पूरी दुनिया को इसका लाभ मिले इसलिए इस पुस्तक को दुनिया की 120 भाषाओं में प्रकाशित किया जा रहा हैं। आचार्य जी ने बताया की, विश्व भैषज संहिता दुनिया लेवल पर विभिन्न जड़ी-बूटियों की संख्या लगभग 4.5 लाख हैं।  इसमें से सिर्फ 68000 जड़ी-बूटियों प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसमें से 15 से 20 हजार जड़ी-बूटियों केवल भारत में पायी जाती हैं। इस प्रकार वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया दुनियाभर में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियो की जानकारी प्राप्त करने की बेस्ट पुस्तक हैं। इसके अलावा आचार्य जी ने कहा, की इस ग्रंथ को लिखने में पंतजलि के 200 अनुसंधानकर्ता का भी पुरुषार्थ लगा हुआ हैं। इस संहिता में कई प्रकार के पेड़-पौधों के 25 हजार जीवंत चित्र, कैनवास चित्र व 35 हजार रेखाचित्रो को प्रकाशित किया गया हैं।

 

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